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तत्काल आरक्षण के लिए भरें गुलाबी रंग का फार्म

Fri, 09 Jan 2015 02:25 AM IST
अमर उजाला कानपुर
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राहुल शुक्ला
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कानपुर। ट्रेनों में तत्काल आरक्षण लेने के लिए अब गुलाबी रंग का फार्म भरना होगा। यह व्यवस्था उत्तर मध्य रेलवे ने अपने सभी आरक्षण केंद्रों में शुरू कर दी है। जबकि पूर्वोत्तर रेलवे के आरक्षण केंद्रों में अभी पुराने सिस्टम(सफेद रग के फार्म) पर ही काम हो रहा है। जल्द ही यहां भी तत्काल आरक्षण के लिए गुलाबी रंग का फार्म शुरू हो जाएगा।
रेलवे आरक्षण केंद्रों पर बिचौलियों की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए रेलवे ने तत्काल आरक्षण का फार्म अलग कर दिया है। अब लोगों को तत्काल में आरक्षण लेने के लिए गुलाबी रंग के फार्म को भरना होगा। इससे पता लग जाएगा कि तत्काल आरक्षण कराने वाले कितने आवेदक लाइन में लगे है। ट्रेनों में तत्काल आरक्षण लेने के लिए पहले आवेदकों को सुबह जल्दी लाइन में लगना पड़ता है। 9:45 बजे से तत्काल को टोकन बंटना शुरू होता है और 10 बजे से काउंटर पर काम शुरू हो जाता है।
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कोट
इस व्यवस्था से टाइम तो बचेगा ही। साथ ही बिचौलिए भी पकड़े जाएंगे। फार्म का रंग गुलाबी होने से ही आरपीएफ और जीआरपी इनको आसानी से   चिह्नित कर सकेगी। यह व्यवस्था दिसंबर माह के अंत में प्रारंभ हो चुकी है।
               नवीनबाबू, सीपीआरओ, उत्तर मध्य रेलवे
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अभी हमारे यहां पर सफेद रंग के फार्म पर ही तत्काल में आरक्षण हो रहा है। जल्द ही यह व्यवस्था रावतपुर, अनवरगंज, कल्याणपुर स्टेशनों पर भी शुरु हो जाएगी। इस बारे में उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी और उन्हें अवगत कराया जाएगा।
             आशीष भाटिया, वरिष्ठ मंडल वाणिज्यिक प्रबंधक, पूर्वोत्तर रेलवे  
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फार्म में चेतावनी भी दी गई
- अस्पष्ट और अपूर्ण आरक्षण फार्म स्वीकार नहीं होंगे
- यात्रा से पहले यदि किसी भी समय यह मालूम पड़ता है कि आवेदक द्वारा दिया गया पता, फोन नंबर या मोबाइल नंबर फर्जी है तो प्रशासन बिना किसी सूचना के तत्काल टिकट को रद कर सकता है
 - यात्रा के दौरान यह पता लगता है कि उसका पता, फोन नंबर या मोबाइल नंबर फर्जी है तो यात्री को न सिर्फ अगले ठहराव स्टेशन पर ट्रेन से उतार दिया जाएगा। बल्कि उसे भारी जुर्माना भी भरना पड़ सकता है और रेलवे एक्ट 1989 के प्रावधानों के तहत उसे जेल भी भेजा जा सकता है
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- टिकट किसी दलाल या अन्य अनाधिकृत ट्रेवल एजेंट से किसी फर्जी नाम, पते या कॉन्टेक्ट नंबर पर खरीदा गया है तो रेलवे एक्ट 1989 के प्रावधानों के तहत यात्री को जुर्माना व जेल भी भेजा जा सकता है।

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