कानपुर में अनवरगंज थाना क्षेत्र में पांच इमारतों में भीषण आग की घटना पर काबू पाने में अग्निशमन विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ी। सीपी ने लखनऊ में फायर डीजी से संपर्क करके वहां के हजरतगंज फायर स्टेशन की हाइड्रोलिक प्लेटफार्म गाड़ी को मंगवाकर किसी तरह स्थिति पर काबू पाया। इस प्रक्रिया में भी घंटों को समय लग गया, जिससे आग को समय रहते नहीं रोका जा सका।
जबकि, जिले के फजलगंज फायर स्टेशन में इसी तरह की हाइड्रोलिक प्लेटफार्म गाड़ी मेनटीनेंस के अभाव में धूल फांक रही है। शुक्रवार देर शाम एक और हाइड्रोलिक प्लेटफार्म गाड़ी प्रयागराज से मंगाई गई। बांसमंडी स्थित होलसेल बाजार में बनी इमारतों को मानकों की अनदेखी करके इस कदर ताना गया है कि आग लगने के बाद अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों को अंदर तक आग बुझाने का रास्ता नहीं मिल सका। इस बीच लगातार आग बुझाने में हो रही लेटलतीफी के चलते आग धधकते हुए एक कॉम्प्लैक्स से दूसरे और दूसरे से चौथे तक पहुंच गई।
इमारतों के बाहर से आग बुझाने का प्रयास कर रहे अग्निशमन कर्मचारियों की मेहनत सिर्फ बाहरी हिस्से की ही आग बुझा पा रही थी। इस समस्या का पता जब सीपी बीपी जोगदंड को चला तो उन्होंने जिले के हाइड्रोलिक प्लेटफार्म को मंगाने के निर्देश दिए, लेकिन सीएफओ दीपक शर्मा ने उसके कंडम होने की जानकारी दी। इस पर सीपी ने नाराजगी जताते हुए तत्काल फायर डीजी से संपर्क करके उनसे हाइड्रोलिक प्लेटफार्म मांगा। तब लखनऊ से करीब डेढ़ घंटे में हाइड्रोलिक प्लेटफार्म शहर पहुंचा और आग बुझाने के सफल प्रयास शुरू हुए।
वहीं, फजलगंज में खड़ी 135 फीट की ऊंचाई तक पहुंचने वाली हाइड्रोलिक प्लेटफार्म गाड़ी का इस्तेमाल अधिकारियों की ओर से बरती गई लापरवाही के कारण नहीं किया जा सका। वर्ष 2015 में इटली से सात करोड़ में इस गाड़ी को मंगायागया था। इस गाड़ी का इस्तेमाल सिर्फ चार से पांच बार ही किया गया था। समय से सर्विस न हो पाने के कारण खड़ी खड़े-खड़े ही कंडम हो गई। गाड़ी की मरम्मत और मेनटीनेंस में करीब 20 लाख का खर्च होना था, जिसे लेकर विभाग की ओर से मुख्यालय को कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन उसपर ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में व्यापारियों में चर्चा रही कि अगर शहर का अपना हाइड्रोलिक प्लेटफार्म दुरुस्त होता तो उनका कम नुकसान होता।