हैलेट अस्पताल में स्ट्रेचर न मिलने पर बुखार से पीडि़त बेटे काे इलाज के कंधे पर ले दाैड़ा पिता (फाइल फाेटाे)
कानपुर में इन दिनाें दाे चीजाें से लाेग बेहद डरे हुए हैं। पहला बुखार, डेंगू, मलेरिया अाैर दूसरा यहां के डाक्टर। दाेनाें ही लाेगाें की जान लेने पर उतारू हाे गए हैं। कम से कम पिछले कुछ दिनाें के अांकड़े अाैर घटनाएं देखकर ताे यही लगता है। खैर 12 साल के मासूम अंश की माैत बिना इलाज के उसके पिता के कंधाें पर हाे गई थी। अमर उजाला की वेबसाइट से वीडियाे वायरल हुअा ताे सरकार के हाथ-पांव फूल गए। सीएमएस काे सस्पेेंड कर मामला रफा-दफा करने की काेशिश शुरू हाे गई। इधर सरकार अाैर प्रशासन अंश की माैत के जिम्मेदाराें काे बचाने में जुटी हुई है, उधर डाक्टराें ने भी ठान लिया है चाहे कुछ हाे जाए वह सुधरेंगे नहीं। शायद इसी साेच के साथ गुरुवार काे दाे अलग-अलग अस्पतालाें में इन धरती के भगवानाें ने इलाज मांग रहे मरीजाें की धुनाई कर दी।
तीन माैत, तीन पिटे
उर्सला में मारपीट के बाद पहुंची पुलिस
ऊपर वाले ने गुरूवार काे तीन जाने लीं ताे नीचे वाले भगवानाें ने भी तीन अन्य लाेगाें काे ऊपर पहुंचाने का मूड बना लिया था। वाे ताे शुक्र था कि लाेगाें के बीच-बचाव कराकर मरीजाें काे डाक्टराें के चंगुल से बचा लिया। बुखार से पहली माैत अमिलिया की रहने वाली सुमन(25) की हुई। वह पिछले कुछ दिनाें से तेज बीमार की शिकार थी। वहीं दूसरी माैत सजेती थानाक्षेत्र के अज्योरी गांव में एक छात्रा की हुई। मृतिका रश्मि (16) हाईस्कूल में पढ़ती थी। उसे तीन-चार दिन पहले बुखार आया था।
माैत के बाद मारपीट
तीसरी माैत डाक्टराें की अनदेखी के चलते हुई। चुन्नीगंज निवासी एक वृद्ध को बुखार के साथ उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद परिजन बुधवार रात उर्सला इमरजेंसी लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि ईएमओ ने वृद्ध को हैलट ले जाने को कह दिया। परिजन काफी देर तक उर्सला में ही भर्ती करने का दबाव बनाते रहे लेकिन जब ईएमओ नहीं माने तो परिजन वृद्ध को लेकर घर चले गए। सुबह वृद्ध की मौत के बाद परिजन शव लेकर इमरजेंसी पहुंचे तो मारपीट हो गई।
जूनियर डॉक्टरों ने महिला को पीटा
फतेहपुर के औंग की रहने वाली गायत्री (25) पत्नी राधेश्याम बुधवार सुबह बाइक से गिरकर घायल हो गई थी। पति ने बुधवार दोपहर गायत्री को हैलट में न्यूरो सर्जरी में उसे डॉ. गजेंद्र सिंह की यूनिट में भर्ती कराया। सीटी स्कैन के बाद शाम को जूनियर डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया। आरोप है कि ग्लूकोज की बोतल में एक के बाद एक कई इंजेक्शन डाल दिए गए। डोज ज्यादा होने के कारण गायत्री ने आंखों के सामने अंधेरा होने की शिकायत की तो जूनियर डॉक्टरों ने उसे पीट दिया। इधर, रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन कराने के लिए न्यूरो सर्जन डॉ. गजेंद्र सिंह की यूनिट में भर्ती शांति (65) पत्नी रामप्रकाश निवासी दादानगर को जूनियर डॉक्टरों ने सिर्फ इसलिए गाली दी क्योंकि उन्होंने अपनी मर्जी से ऑपरेशन की दवाएं बाहर से खरीद ली थी। इसी तरह कानपुर देहात के मूसानगर स्थित सुल्तनापुर की निधि (16) पुत्री संतोष को हैलट मेडिसिन के जूनियर डॉक्टरों ने गुरुवार सुबह भगा दिया। बार-बार बेहोश होने के कारण परिवार वाले निधि को लेकर बुधवार रात हैलट पहुंचे थे।
डेंगू पॉजिटिव मरीजों की संख्या 300 पार
डाक्टराें अाैर तीमारदाराें के बीच हुर्ई मारपीट में टूटा अस्पताल का शीशा
डेंगू पॉजिटिव मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की जांच में गुरुवार को 55 नए मरीज मिले हैं। इसी के साथ अब तक डेंगू पॉजिटिव मरीजों की संख्या 329 पहुंच गई है। शासन के कड़े रुख के बाद भी स्वास्थ्य विभाग झूठ बोलना नहीं छोड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को डीएम को जो आंकड़े दिए, उनमें अब तक 283 डेंगू पॉजिटिव मिले हैं जिनमें सिर्फ 10 ही शहर के रहने वाले हैं जबकि शहर के हर कोने में डेंगू के मरीजों का मिलना जारी है।
इस बीच हैलट और उर्सला में स्वास्थ्य सेवाएं ठीक न होने से डेंगू पॉजिटिव मरीज प्राइवेट अस्पतालों में जा रहे हैं। हैैलट के डेंगू वार्ड में गुरुवार को सिर्फ एक मरीज भर्ती हुआ। वहीं, उर्सला में अब तक कोई भी डेंगू पॉजिटिव मरीज भर्ती नहीं हुआ है।