केडीए वीसी का पद आया राम, गया राम सा हो गया है। विकास का दंभ भरने वाली प्रदेश सरकार ने शहर के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण संस्थान केडीए के मुखिया पद को फुटबाल बना दिया है। तीन दिन पहले विवेक कुमार केडीए वीसी का चार्ज लेकर गए और गुरुवार को फिर जयश्री भोज को केडीए वीसी बना दिया गया। पिछले महीमे ही उन्हें हटाया गया था। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर जब वीसी बनाए रखना था तो हटाया ही क्यों? पहली बार जयश्री भोज का तबादला होने से करीब 15 दिन तक और दूसरी बार करीब एक माह तक केडीए वीसी की कुर्सी खाली रही। इस दौरान विकास छोड़कर सिर्फ नए वीसी को लेकर कयासबाजी का ही दौर चला।
शहर में सीएम की प्राथमिकताओं वाले बड़े-बडे़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। चुनावी साल में सरकार का भी दबाव इन्हें जल्द से जल्द पूरा करने का है। शहरवासियों को भी विकास कार्यों की सौगात मिलने का बेसब्री से इंतजार है। ऐसी स्थिति में वीसी को हटाना, फिर नियुक्त करना, फिर हटाना फिर नियुक्त करना मखौल के सिवा कुछ नहीं। जयश्री भोज ने केडीए वीसी रहते हुए कई बड़े प्रोजेक्टों को शुरू कराया। जनता की सुविधाओं के लिए कई योजनाएं और सुविधाएं लागू कीं। इसके बावजूद उन्हें 25 जुलाई को ट्रांसफर कर दिया गया। यह सरकार की मंशा पर भी बड़ा सवालिया निशान है और जनहित के कामों का रोड़ा भी।