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24 घंटे से भूखी मां ने पहले बेटियों को दी मौत फिर खुद फांसी पर झूली, अब पति को मिली उम्रकैद

Fri, 06 Sep 2019 12:27 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कोर्ट ने सुनाया फैसला - फोटो : अमर उजाला
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दहेज के लिए प्रताड़ना से तंग आकर दो मासूम बच्चियों की हत्या कर आत्महत्या को मजबूर हुई महिला के पति को इस कृत्य का दोषी करार देते हुए कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही दस हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। सुबूतों के आधार में कोर्ट ने महिला के चाचा ससुर को दोषमुक्त करार दिया। 
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नौबस्ता के जयप्रकाश यादव ने अपनी बहन नीलम की शादी बकेवर (फतेहपुर) के सुनील यादव के साथ वर्ष-2011 में की थी। नीलम और सुनील के दो बेटियां सोनम और साक्षी थीं। शादी के बाद से ही ससुराल वाले नीलम को दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे थे। इस पर नीलम मायके में रहने लगी थी।

 

घटना से तीन माह पहले ही दोनों पक्षों में इस बात पर समझौता हुआ कि सुनील पत्नी और बच्चियों को अपने चाचा राजाराम के नौबस्ता स्थित मकान में रखेगा। सुनील पत्नी और बेटियों को ले तो आया, पर परवरिश पर ध्यान नहीं देता था। 18 फरवरी 2016 की रात नीलम के पिता बेटी और नातिनों से मिलने उसके घर पहुंचे तो देखा कि दरवाजा खुला है।

अंदर पहुंचे तो देखा कि सोनम व साक्षी की गला दबाकर हत्या कर दी गई और नीलम छत के कुंडे से साड़ी के फंदे पर लटकी थी। एडीजीसी संजय झा ने बताया कि जयप्रकाश ने पति सुनील, ससुर बच्चा लाल और चाचा राजाराम के खिलाफ दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचक ने सुनील और राजाराम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। चाचा राजाराम पर दहेज प्रताड़ना का आरोप साबित नहीं हो सका। अपर जिला जज-22 मोहम्मद शफीक की अदालत ने सुनील को उम्र कैद की सजा सुनाई।

 
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24 घंटे से भूखी थीं मां और बेटियां, कोर्ट ने कहा पति रहम के लायक नहीं 

नीलम अपनी तीन वर्षीय बेटी सोनम व डेढ़ वर्षीय साक्षी को भूख से बिलखते हुए देख नहीं सकी थी। मोबाइल के चार्जर से दोनों बेटियों की गला दबाकर हत्या करने के बाद खुद फंदे पर झूल गई थी। एडीजीसी संजय झा ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ था कि 24 घंटे से ज्यादा समय से तीनों ने कुछ नहीं खाया था।

सुनील के अधिवक्ता की रहम की अपील खारिज करते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि जिन हालात में यह अपराध हुआ, उसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है। मृतका के सामने बहुत विषम परिस्थिति थी। जीवन की सारी आशाएं व बच्चियों का भविष्य धूमिल देखते हुए घटना हुई। सुनील द्वारा क्रूरता की सारी हदें पार की गईं। अपराध गंभीर प्रकृति का है, इसलिए रहम की अपील बेमानी है।
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