एचडीएफसी ने शुरू किया देश का पहला एसएमई बैंक
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कानपुर। भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की वजह से डी ग्रेड बैंकों की श्रेणी में शामिल यूनाइटेड मर्केंटाइल कोआपरेटिव बैंक का एक और कारनामा सामने आया है। सिक्योर्ड करेंट एकाउंट के लिए जमा की गई 20 लाख रुपये कीमत की एफडीआर (फिक्सड डिपॉजिट रिसिप्ट) बैंक से गायब होने पर खाताधारक के पिता के पीएफ, ग्रेच्युटी और अन्य बीमा पॉलिसी की रकम रोक ली गई। इतना ही नहीं, बैंक ने खाताधारक के बचत खाते से करीब 24 लाख रुपये निकालकर उसकी अनुमति के बिना करेंट एकाउंट में शिफ्ट कर दिए। पीड़ित ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई है। उच्च अदालत ने अब बैंक प्रबंधन से जवाब तलब किया है।
कल्याणपुर के इंद्रानगर निवासी अत्रि शर्मा ने 16 जनवरी 2008 को यूनाइटेड मर्केंटाइल कोआपरेटिव बैंक की सिविल लाइंस स्थित डीजी कालेज शाखा में मीडिया एड एजेंसी के नाम से 25 लाख रुपये लिमिट का सिक्योर्ड करेंट एकाउंट खोला था। इसकी गारंटी में करीब 20 लाख रुपये की एफडी जमा की गई थी। उस वक्त इनके पिता पतंजलि शर्मा इसी बैंक में मैनेजर पद पर तैनात थे। 10 अगस्त 2011 तक अत्रि शर्मा ने 25 लाख रुपये लिमिट तक धन निकाल लिया। पैसा न जमा होने पर बैंक ने इन्हें एफडीआर जब्त कर लेने के नोटिस भी भेजे। इसके बाद भी अत्रि शर्मा ने रकम जमा नहीं की तो बैंक ने इनके बचत खाते से पहली बार में 19 लाख रुपये और दूसरी बार पांच लाख रुपये करेंट एकाउंट (लोन एकाउंट) में ट्रांसफर कर दिए। बकाए धन की वसूली के लिए इसके पिता के 2012 में रिटायरमेंट के बाद उनका पीएफ, ग्रेच्युटी व बीमा पॉलिसी की रकम रोक ली गई। अत्रि शर्मा ने वसूली के लिए एफडीआर जब्त करने की बात कही तो बताया गया कि प्रपत्र बैंक से गायब हैं।
इस पर अत्रि ने गत आठ जुलाई को हाईकोर्ट में बैंक के सेक्रेटरी रामचंद्र वर्मा, लोन मैनेजर सर्वेश मिश्रा और वसूली मैनेजर अनिल कुमार के खिलाफ याचिका दायर की। हाईकोर्ट के जज अश्वनी मिश्रा ने मामले की सुनवाई करते हुए बैंक प्रबंधन से एफडीआर की जानकारी मांगी है। साथ ही पूछा है कि पिता का पीएफ किस आधार पर रोका गया? अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी।