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‘कम नंबर का मतलब असफलता नहीं’

Fri, 22 Jul 2016 12:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
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आईआईटी के ऑडिटोरियम में काउंसलिंग के दौरान भाग लेते स्टूडेंटों के अभिभावक। - फोटो : amarujala
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कानपुर। आईआईटी के बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बीटेक) और बैचलर ऑफ साइंस (बीएस) में एडमिशन लेनेवाले स्टूडेंटों का गुरुवार को आडिटोरियम में ओरिएंटेशन हुआ। निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना ने स्टूडेंटों से सीधा संवाद किया और कहा कि कम नंबर आने का मतलब असफलता नहीं है। इसका मतलब हमारी मेहनत में कहीं कोई कमी रह गई है। इसे दूर भी किया जा सकता है। इसलिए कम नंबर आने पर निराश नहीं होना चाहिए। ऐसा हो तो ज्यादा जोश के साथ मेहनत करना चाहिए। 
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आईआईटी के बीटेक और बीएस में एडमिशन लेने वाले 827 स्टूडेेंटों ने रिपोर्टिंग की। सबको हॉस्टल मिले और गुरुवार को ओरिएंटेशन प्रोग्राम भी हो गया। स्टूडेंटों ने वाई-16 का घेरा बनाकर अपने पहुंचने का संदेश दिया। इसके बाद निदेशक ने कहा कि देश और दुनिया के लिए कुछ अच्छा करें। ऐसी खोज करें, जिससे लोग आपकी प्रतिभा को पहचानें। कोई भी समस्या बड़ी नहीं होती। बस आपको समझना होगा कि वास्तव में समस्या क्या है। समर्पण से ज्ञान मिलता है। जब तक आप किसी चीज के प्रति समर्पित नहीं होंगे, आप उसे प्राप्त नहीं कर सकते। इस दौरान डीन स्टूडेंट ऑफ अफेयर्स प्रो. एआर हरीश, काउंसलिंग सेल प्रभारी प्रो. एमके घोराई ने स्टूडेंटों से कहा कि आप लोग देश के सबसे बड़े प्रौद्योगिकी संस्थान का हिस्सा बन चुके हैं। यहां रहकर इतिहास रच सकते हैं। तकनीक विकसित करने, उद्यमिता अपनाने और इनोवेशन के लिए आईआईटी से अच्छा प्लेटफार्म नहीं मिल सकता है।   
स्टूडेंटों पर न डालें अच्छा करने का दबाव’
आईआईटी में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंटों के साथ ही उनके माता-पिता की काउंसलिंग भी की गई। काउंसलिंग सेल के सदस्योें ने कहा कि स्टूडेंटों पर बहुत अच्छा करने या फिर अच्छे मार्क्स लाने का दबाव कतई नहीं डाला जाना चाहिए। यह काम माता-पिता या फिर अभिभावक ही करते हैं। ऐसा हुआ तो स्टूडेंट तनाव में आएंगे। तनाव में ही गलत कदम उठते हैं। आईआईटी में आने वाला हर स्टूडेंट मेधावी और क्षमतावान है। उन्हें सिर्फ गाइड करने की जरूरत है। प्रो. शर्मिष्ठा चक्रवर्ती ने कहा कि एकेडमिक प्रेशर के चलते कोई स्टूडेंट सुसाइड नहीं करता है। इसका मुख्य कारण रिलेशनशिप होता है। चाहे वह पारिवारिक हो या फिर प्यार। पारिवारिक झगड़े और ब्रेकअप से वह तनाव में आकर खतरनाक कदम उठा लेते हैं। 
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कैंपस का माहौल रैगिंग फ्री 
ओरिएंटेशन के दौरान बताया गया कि आईआईटी कैंपस का माहौल रैगिंग फ्री है। यह आपराधिक कृत्य है। रैगिंग में शामिल स्टूडेंट को संस्थान से निकालने और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। अपरिहार्य घटना न घटे, इसके लिए हॉस्टल में अलर्ट रखा गया है। सीनियर स्टूडेंट को निगरानी में लगाया गया है। वार्डेन भी निगाह रखे हैं। 
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