बेटे की मौत पर बदहवास मां और अन्य परिजन
- फोटो : अमर उजाला
मेरा होनहार बेटा (सचिन) फांसी नहीं लगा सकता है। वह पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाता था। पीसीएस की तैयारी करने कानपुर आया था। पोस्टमार्टम हाउस में पहुंचे सचिन के पिता महावीर सिंह यादव यह कहकर फूट-फूटकर रो पड़े।
आपको बताते चलें शुक्रवार को कानपुर के गीतानगर स्थित पेंट गोदाम में इटावा निवासी सचिन (26) और चौकीदार (आईटीआई छात्र) दीपक (25) का शव फंदे पर लटका मिला था। शनिवार को डॉक्टरों के पैनल से शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। दोनों की मौत की वजह फांसी बताई गई। महावीर ने हत्या कर शव लटकाए जाने की तहरीर दी है। काकादेव पुलिस मामले की जांच कर रही है।
मृतक सचिन के पिता (बीच में)
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डेढ़ साल पहले शहर आया था सचिन
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की सुरक्षा में तैनात टिकैत राय तालाब, राजाजीपुरम (लखनऊ) निवासी महावीर सिंह यादव ने बताया कि बड़ा बेटा सचिन डेढ़ साल पहले कानपुर आया था। वह विजय नगर में विजय गुप्ता के मकान में रहकर काकादेव स्थित एक कोचिंग सेंटर में पीसीएस की तैयारी कर रहा था।
उन्होंने बताया कि सचिन बीटेक, बीएड, टीईटी और सुपर टीईटी पास आउट है। वर्ष 2015 में हुई शिक्षक भर्ती परीक्षा भी उत्तीर्ण की थी। मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। बेटे की मौत से मां कुसुमा, दोनों भाई विपिन और विनय का रो-रोकर बुरा हाल था। महावीर मूलरूप से सैफई (इटावा) के रहने वाले हैं।
कल यहीं मिली थी सचिन की फांसी के फंदे पर झूलती हुई लाश
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सिक्योरिटी इंचार्ज ने बंद किया मोबाइल
दीपक के पिता द्वारिका पाल का आरोप है कि पेंट गोदाम के मालिक व सिक्योरिटी इंचार्ज अरुण पांडेय ने घटनास्थल पर आने तक की जहमत नहीं उठाई। अब मोबाइल भी स्विच ऑफ कर लिया। ऐसे में सिक्योरिटी इंचार्ज की भी भूमिका की जांच होनी चाहिए।
सोशल साइट के जरिए हुई थी दोस्ती
कश्यप नगर निवासी दीपक (25) और सचिन (26) की दोस्ती सोशल साइट के जरिए हुई थी। हालांकि परिजनों को दोनों की दोस्ती के बारे में पता नहीं था। पुलिस ने उनके मोबाइलों को कब्जे में लिया है। साइबर एक्सपर्ट की मदद से कॉल डिटेल निकलवाई जा रही है। फिलहाल दोनों के फांसी लगाने की वजह पहेली बनी हुई है।