रोते-बिलखते मृतक के परिजन
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पुलिस राजेश की ससुराल शेरअलीखेड़ा पहुंची तो वहां ग्रामीणों ने ससुरालीजनों पर ही उसकी हत्या का शक जाहिर किया। 19 मई को पुलिस ने मृतक के ससुर हरिपाल यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने माखी थानाक्षेत्र के मर्दनखेड़ा निवासी नाती (बेटी का लड़का) रंजन यादव पुत्र रामबाबू के साथ मिलकर राजेश के अपहरण की बात स्वीकार की लेकिन हत्या से इंकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया था। पुलिस ने राजेश व ससुराल वालों के मोबाइल की सीडीआर निकलवाई और सर्विलांस पर लगाकर जांच की। साले गुंजन यादव पर शक हुआ।
शनिवार शाम पुलिस उसे कोतवाली लेकर आई पूछताछ की तो उसने सच्चाई उगल दी। गुंजन ने बताया कि उसके तीन बड़े भाई उदयभान, चंद्रभान और चंदन व पिता गांव के पूर्व प्रधान सुरेंद्र यादव के भाई गुड्डू की हत्या के मामले में आठ साल पहले जेल गए थे। पिता हरिपाल नौ महीने पहले जमानत पर छूटकर आए हैं जबकि तीनों भाई जेल में हैं। पिता हरिपाल अपने दामाद राजेश से पूर्व प्रधान सुरेंद्र की हत्या कराकर दुश्मनी का बदला लेना चाहते थे। राजेश ने इंकार कर दिया।
इसी खुन्नस में पिता ने राजेश की हत्या कर इल्जाम में पूर्व प्रधान को जेल भेजवाने की योजना बनाई। इसमें परिवार ने उनका साथ देते हुए हत्या की वारदात को अंजाम दिया। जिस दिन राजेश उनके घर (ससुराल) आया उसे मीट खिलाया और जमकर शराब पिलाने के बाद मारपीट कर गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद रात में ही शव गांव से करीब एक किलोमीटर दूर जवाहरखेड़ा निवासी ठाकुर के खेत में स्थित कुएं में फेंक दिया था।