मकान मालिक की गवाही पर उठे सवाल
पति ने अपने बचाव के लिए मकान मालिक उमाकांत अग्रिहोत्री को कोर्ट में बतौर गवाह पेश किया था। उमाकांत ने गवाही में कहा था कि घटना के समय वह घर पर सो रहा था। शोर सुनकर मौके पर पहुंचा तब अभियुक्त मृतका को घटनास्थल से उठाकर ले जा रहा था। कोर्ट ने माना कि गवाह को जो भी जानकारी हुईए वह अभियुक्त ने उसे दी, उसने खुद घटना को नहीं देखा। गवाह का कहना था कि उसने पति-पत्नी के बीच कभी झगड़ा होते नहीं देखा और न ही सुना। इस पर कोर्ट ने माना कि लोकलाज के भय के कारण सामान्यत: पारिवारिक विवाद घर की चहारदीवारी के अंदर होते हैंए इसलिए सबको इसकी जानकारी होना संभव नहीं है।
कोर्ट में नहीं चली पत्नी के पिता को उधार देने की कहानी
पति ने अपने बचाव में कोर्ट में दिए बयान में कहा था कि उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत थी। पत्नी के पिता ही उससे उधार रुपये मांगते थे, वहीं दूसरी तरफ उसने कहा कि वह 21 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पाता था। 3500 रुपये किराया देता था। बाकी रुपयों से पत्नी-बेटी का खर्च उठाता था। महीने के अंत में मुश्किल से ही कुछ बचत हो पाती थी। पति के बदलते बयान ने उसकी खुद की कहानी को ही झूठा साबित कर दिया।
घटना जून 2022 को हुई। रिपोर्ट दर्ज करते ही अगले दिन पति को जेल भेज दिया गया। विवेचक ने सितंबर 2022 में ही विवेचना पूरी कर चार्जशीट कोर्ट भेज दी थी। कोर्ट ने आरोप तय किए और गवाही शुरू हो गई। अभियोजन की ओर से नौ गवाह तो बचाव पक्ष की ओर से भी छह गवाह कोर्ट में पेश किए गए। अभियुक्त कुशल को जमानत न मिलने के कारण वह लगभग ढाई साल से जेल में ही बंद है। तेजी से अभियोजन कार्यवाही पूरी कराई गई। लगभग सवा दो साल में न्यायिक कार्यवाही पूरी कर कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। -प्रदीप कुमार साहू, एडीजीसी