यूपी में फतेहपुर जिले के सहिली हत्याकांड में मृतका की दूसरी बेटी इला के बालिग होने तक बंद घर की सख्त निगरानी होने की जरूरत है। ताला बंद घर में लाइसेंसी राइफल, पुरानी करेंसी, जेवरात समेत तमाम कीमती सामान है। मलवां थाना पुलिस घर की निगरानी बनाए है।
मां बेटी की हत्या में दोषी पाए गए पारिवारिक आदित्य नारायण अवस्थी भले ही जेल में हैं लेकिन उनकी दहशत पूरी सहिली में है। आरोप है कि उसकी एक धमकी से ईला के खेत की रखवाली करने वाले बटाईदार ने काम छोड़ दिया। सहिली गांव की विमला देवी क्लर्क और उनकी बेटी कुमुद की हत्या के बाद परिवार की इकलौती वारिस इला है। हत्यारोपियों की गोली लगने के बाद भी वह बच गई थी।
जेल से ही संदेश भेजवाया था
तत्कालीन एसडीएम विवेक श्रीवास्तव और सीओ सिटी समरबहादुर ने रोड से जुड़ी 45 बीघा कृषि योग्य भूमि को गांव के एक परिवार को बटाई में दिला दिया था। तय हुआ था कि पैदावार की रकम इला के खर्च को पहुंचाई जाती रहेगी।
हालांकि नाबालिग होने के नाते इला की जानमाल की सारी जिम्मेदारी सरकारी व्यवस्था के तहत खुद हो रही थी। परिवार के करीबी सदस्यों के मुताबिक आदित्य ने जेल से ही फसल में काम करने वाले बटाईदार को संदेश भेजवाया था।
इससे ही आदित्य की ग्रामीणों में दहशत का अंदाजा लगाया जा सकता है
उसने कहा था कि वह मुकदमे के फैसले तक जमीन की देखरेख से दूर हो जाए। लिहाजा एक फसल के बाद ही बटाईदार ने खेत में जाने से हाथ खड़ा कर दिया। इसके बाद से इस बेशकीमती जमीन पर किसी ने निगाह डालने की भी हिम्मत नहीं जुटाई। इससे सहज ही पूर्व प्रधान आदित्य नारायण की ग्रामीणों में दहशत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
सहिली के इस अवस्थी परिवार की अधिकांश जमीन रोड किनारे है। हत्या में दोषी पाए गए दिनेश नारायण अवस्थी उर्फ गांधी वकील एक साल पहले जमानत पर छूटे थे। मामले की पैरवी से परिवार में आर्थिक तंगी के हालात पैदा हो गए थे। इस पर उन्होंने रोड साइड का 25 बाई 50 का एक प्लाट बेच डाला। उस प्लाट को एक व्यक्ति ने 18 लाख रुपये में खरीदा था।