नकली दवाओं के खिलाफ अभियान की वजह से फेंका
बताया जा रहा है कि प्रदेश में चल रहे नकली दवाओं के खिलाफ अभियान की वजह से इन दवाओं को यहां फेंका गया है। कुछ ग्रामीणों ने इन दवाओं को मेडिकल स्टोरों में औने-पौने दामों में बेचने की कोशिश भी की, लेकिन चर्चा फैलने के बाद कई मेडिकल स्टोर संचालकों ने इन्हें खरीदने से मना कर दिया।
मामले की जांच के निर्देश
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिला महामंत्री राजेश सोनी ने बताया कि फेंकी गईं दवाओं की कीमत करोड़ों रुपये हो सकती है और इनकी जांच होनी चाहिए। एडीएम वित्त एवं राजस्व डॉ. अविनाश त्रिपाठी ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।