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फतेहपुर विवाद: पद्मा सिंह तक नहीं पहुंच सकी पुलिस, दबिश देने गई थी खाली हाथ लौटी

Thu, 06 Nov 2025 10:30 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर

सार

एफआईआर के बाद गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने रात में दबिश दी। महिला का आरोप है कि पुलिस ने महिलाओं से हाथापाई और अभद्रता की। दबिश के दौरान पुलिस और महिला की नोकझोंक का वीडियो वायरल हो रहा है।
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फतेहपुर विवाद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विवादित धार्मिक स्थल (मंदिर-मकबरा) के सामने देव दीपावली की शाम पुलिस और महिलाओं के बीच हुए विवाद के मामले में रात को कई घरों में दबिश दी गई। पुलिस की दबिश सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। दबिश के दौरान महिला और सदर कोतवाल के बीच जमकर नोकझोंक हुई।
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मामले में पुलिस ने सपा से निष्कासित और वर्तमान में बीजेपी कार्यकर्ता पप्पू सिंह चौहान की पत्नी पद्मा सिंह को मुख्य आरोपी बनाया है। पद्मा सिंह ने पुलिस पर महिलाओं से हाथापाई और अभद्रता का आरोप लगाया है। पुलिस ने बताया कि विवादित धार्मिक स्थल मामले में पप्पू सिंह चौहान पूर्व में भी नामजद है। आबूनगर रेड्डया मोहल्ले में विवादित धार्मिक स्थल को महिलाओं ने ठाकुर द्वारा मान दीप जलाकर देवताओं की आरती बुधवार को की थी। महिलाएं विवादित धार्मिक स्थल के बाहर की गई बैरिकेडिंग के बाहर गली में थीं।

सदर कोतवाल तारकेश्वर राय समेत भारी पुलिस फोर्स पहुंचा था। महिलाओं और कोतवाल के तीखी झड़प हुई थी। इसके वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुए। पुलिस और महिलाओं का दावा है कि वायरल वीडियो में अपशब्द भी बोले गए हैं। पुलिस ने रात को महिला कांस्टेबल मंजू की तहरीर पर पप्पू सिंह चौहान की पत्नी पद्मा सिंह और 20 अन्य महिलाओं के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा, सरकारी कर्मचारियों को गाली गलौज कर झूठे मुकदमे में फंसाने की रिपोर्ट दर्ज की।
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एफआईआर के बाद रात को सदर कोतवाल फोर्स के साथ पप्पू सिंह को पकड़ने पहुंचे। पुलिस के बुलाने पर उनकी पत्नी पद्मा सिंह फिर सामने पहुंचीं। पुलिस ने पप्पू सिंह को बुलाने का दबाव बनाया। इस पर पत्नी बोली कि पूजा करना उनके खिलाफ अपराध बनता है तो उन पर कार्रवाई की जाए। पति ने कुछ नहीं किया। पुलिस बोली कि पूरे मामले के पीछे पप्पू सिंह ही शामिल है। करीब पांच मिनट तक जमकर नोकझोंक चली। पूरा मामला सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। पुलिस आसपास के घरों में दबिश देकर उल्टे पांव लौट गई।

पुलिस की दबिश की दहशत से कई घरों में बृहस्पतिवार सुबह ताले लटके नजर आए। विवादित धार्मिक स्थल पर सदर कोतवाल पूरे दिन निगरानी में मौजूद रहे। सदर कोतवाल तारकेश्वर राय ने बताया कि पुलिस के साथ अभद्रता की गई है। मामले में आरोपियों में किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

11 अगस्त को विवाद के बाद से बरती जा रही सतर्कता
मठ मंदिर संघर्ष समिति की ओर से सात अगस्त को जिला प्रशासन से स्थल पर सफाई के लिए ज्ञापन सौंपा था। प्रशासन ने अनुमति नहीं दी थी। हिंदू संगठनों और बीजेपी जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल की अपील पर 11 अगस्त को कर्पूरी ठाकुर चौराहे पर भारी भीड़ इकट्ठा हुई थी। भीड़ बैरिकेडिंग तोड़कर स्थल तक पहुंची थी। यहां तोड़फोड़ की गई थी। दो समुदाय आमने-सामने हो गए थे। मामले में बीजेपी नेता अभिषेक शुक्ला, आशीष त्रिवेदी, पप्पू सिंह चौहान, धर्मेंद्र सिंह जनसेवक, भाजयुमो नेता प्रसून तिवारी, सभासद रितिक पाल, विनय तिवारी, पुष्पराज पटेल, जिला पंचायत सदस्य रिंकू लोहारी, दलित समाज के नेता देवनाथ धाकड़े व 160 अन्य पर एफआईआर दर्ज की गई थी। स्थल पर अस्थायी पुलिस चौकी बनाई गई है। चारों तरफ से 15 फीट ऊंची जाली की बैरिकेडिंग भी कराई गई है। फिलहाल विवादित धार्मिक स्थल का मामला सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में विचाराधीन चल रहा है। इसकी अगली तारीख 12 नवंबर को लगी है।

दूसरा पक्ष भी लामबंद, हालात बिगड़ने से बचे
11 अगस्त की तरह ही बुधवार शाम भी हालात बिगड़ने से बच गए। पुलिस के मुताबिक एक ओर हिंदू महिलाएं विवादित धार्मिक स्थल की ओर जा रहीं थीं। दूसरी ओर से विशेष समुदाय की महिलाएं और पुरुष भी लाठी-डंडे लेकर गलियों में आ गए थे। गलियों से नारेबाजी भी शुरू हो गई थी। पुलिस ने विशेष समुदाय के लोगों को आगे आने पर कड़ी चेतावनी दी। इसके बाद हिंदू महिलाओं को पुलिस ने लौटाया।
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