यूपी के फर्रुखाबाद जिले के छोटे सें गांव से निकलकर एक दृष्टिबाधित क्रिकेटर ने टीम इंडिया तक का सफर तय कर लिया है। वह हाल ही में श्रीलंका में खेली गई दृष्टिबाधित सीरीज में टीम इंडिया का हिस्सा रहे थे। हालांकि उनका बल्लेबाजी क्रम नीचे होने से उन्हें बैटिंग करने के ज्यादा मौके नहीं मिले।
शमसाबाद क्षेत्र के छोटे से गांव रमापुर में एक किसान राजवीर सिंह के घर जन्मे गौरव सिंह राजपूत बचपन से ही आखों से कम देख सकते थे। वह बी-2 कैटेगरी (दो मीटर तक देख सकते हैं) के ब्लाइंड हैं। 11 साल की उम्र में उनके पिता उन्हें पढ़ाई के दिल्ली के लाजपत नगर स्थिति इंस्टीट्यूट फॉर ब्लाइंड पर्सन ले गया। वहां गौरव पढ़ाई के साथ साथ क्रिकेट भी खेलने लगे। इस दौरान उनका चयन इंटर स्कूल टूर्नामेंट के लिए हो गया। स्कूल टीम से उन्होंने कई मैचों में हिस्सा लिया। इसके बाद 2017 में देहरादून में होने वाली नॉर्थ जोन ब्लाइंड क्रिकेट टूर्नामेंट में वह स्टेट टीम की ओर से खेले। यहां उनका प्रदर्शन शानदार रहा। यहां खेले गए तीन मैच में गौरव ने ऑलराउंडर प्रदर्शन करते हुए तीन मैच में दो लगातार शतक समेत करीब 250 रन जड़ दिए। साथ ही छह विकेट भी अपने नाम किए।
विज्ञापन
2 of 3
विजेता ट्राफी हाथ में लिए गौरव
इसके बाद पिछले माह 12 जुलाई से श्रीलंका में खेली गई सीरीज के लिए भी गौरव टीम का चयन टीम इंडिया में हो गया। पांच मैचों की सीरीज में गौरव को तीन मैच में मौका मिला। इसमें एक मैच में उन्होंने नाबाद रहते हुए तीन रन बनाए, एक में वह एक रन बना कर आउट हो गए। जबकि तीसरे मैच में गौरव को बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला। एक मैच में गौरव ने एक ओवर बॉलिंग भी की। इस दौरान वह कुछ खास नहीं कर सके।
2020 में होगा विश्व कप
दृष्टिबाधित क्रिकेट का विश्वकप 2020 में होना है। गौरव ने बताया कि फिलहाल तो वह इसके लिए होने वाले ट्रायल की तैयारी कर रहे। हैं। यदि ट्रायल में सफल हो गए तो वह विश्वकप में टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व करते नजर आएंगे। गौरव अब दिल्ली के शिवाजी कालेज में बीए में पढ़ रहे हैं। उनकी इस सफलता पर गांव के लोग भी खासे खुश हैं। गांव पहुंचने पर परिजनों व ग्रामीणों ने उसका स्वागत किया।