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Farrukhabad: चूल्हे की चिंगारी ने 11 परिवारों को किया बेघर, लाखों की नगदी गृहस्थी जलकर राख, इलाके में कोहराम

Thu, 23 Apr 2026 01:35 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद

सार

Farrukhabad News: शमसाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत गंगा कटरी के समैचीपुर चितार गांव में गुरुवार सुबह चूल्हे की चिंगारी से लगी आग ने बड़ा नुकसान कर दिया। खाना बनाते समय उठी चिंगारी तेज हवा के कारण देखते ही देखते भड़क उठी और करीब 11 झोपड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया।
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घटना स्थल पर आग बुझाते ग्रामीण - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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आग की चपेट में आकर लाखों रुपये की गृहस्थी जलकर नष्ट हो गई, जिससे सभी प्रभावित परिवार बेघर हो गए और उनके सामने भोजन का संकट भी खड़ा हो गया है। जानकारी के अनुसार, गांव निवासी सोहेल की पुत्री असरीना सुबह चूल्हे पर खाना बना रही थी, तभी एक चिंगारी से झोपड़ी में आग लग गई। तेज हवा के चलते आग तेजी से फैली और आसपास की झोपड़ियों को भी अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें उठती देख गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोग बचाव में जुट गए। ग्रामीणों ने तत्काल पुलिस, फायर ब्रिगेड, राजस्व और पशुपालन विभाग को सूचना दी।

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झोपडी में लगी आग से राख हुई गृहस्थी - फोटो : amar ujala

थाना पुलिस सुबह करीब 8 बजे पहुंची, जबकि दमकल टीम करीब 9 बजे मौके पर पहुंची। तब तक ग्रामीण करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत कर आग पर काफी हद तक काबू पा चुके थे। हालांकि राजस्व और पशुपालन विभाग की टीम के देर से पहुंचने पर ग्रामीणों में नाराजगी देखी गई। लेखपाल पंकज सिंह करीब 11 बजे मौके पर पहुंचे और नुकसान का आकलन किया, जबकि पशुपालन विभाग की टीम 10:45 बजे पहुंचकर झुलसे जानवरों का उपचार किया। आग बुझाने में ग्राम प्रधान ताराबानो के पुत्र शिजवान ने गंगा नदी में पंप सेट लगाकर अहम भूमिका निभाई। पुलिस के अनुसार, घटना में कोई जनहानि नहीं हुई है, लेकिन कई परिवारों का सब कुछ जल गया।

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गृहस्थी जलने के बाद बेघर हुए लोग - फोटो : amar ujala

पीड़ितों में अकीशन बेगम की झोपड़ी और घरेलू सामान के साथ करीब 81 हजार रुपये की नकदी जल गई, साथ ही दो जानवर झुलस गए। ईदुल की झोपड़ी के साथ 31 हजार रुपये की नकदी भी जल गई। इसके अलावा सुहेल, नौशाद, शमशाद, मयशाद, हासमा बेगम, शाहरुख, हुस्नमोहम्मद, नजरुल और खान मोहम्मद समेत कई लोगों की झोपड़ियां और गृहस्थी नष्ट हो गई। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से तत्काल राहत और मुआवजे की मांग की है। फिलहाल ये 11 परिवार दूसरों की झोपड़ियों या पेड़ के नीचे शरण लिए हुए हैं। गांव में मातम का माहौल है और पीड़ित महिलाएं राख के ढेर में अपनी बची-खुची गृहस्थी तलाश रही हैं।

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