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लिपिकों की कुर्सी पर भी करते हैं काम
वह खुद ही रैक से फाइलें निकालते और लगाते हैं। यही नहीं केबिन के अंदर कागजों को पलटते ही नहीं, बल्कि लिपिकों की कुर्सी पर काम भी करते हैं। नियम तो यह है कि बाहरी व्यक्ति सरकारी अभिलेखों को छूना, तो दूर केबिन में घुसना भी अपराध है। मगर यहां दलाल ही सब कुछ संभालते हैं। एआरटीओ प्रशासन और प्रवर्तन दोनों ही खुद प्रथम तल पर बैठते हैं।
8.09 मिनट के स्टिंग में खुलासा
नीचे क्या-क्या गुल खिल रहे हैं, इससे उन्हें कोई मतलब नहीं है। इससे शह होने का संदेह को बल मिल रहा है। संवाद न्यूज एजेंसी के 8.09 मिनट के एक स्टिंग ने केबिनों के अंदर दलालों का राज, खुलेआम धन उगाही, फाइलों को रेक में उठाने और रखने के साथ लिपिक अपने निजी चेला के पास मौजूद एक झोले में रखकर बाहर ले जाने की तैयारी करते दिख रहे हैं।
बंद सीसीटीवी को चालू करने के दिए थे निर्देश
पिछले महीने आरटीओ बांदा ने औचक निरीक्षण में बंद सीसीटीवी को चालू करने के निर्देश दिए थे। इन्हें इसलिए बंद रखा जाता कि कोई सबूत कैद न हो जाए। शाम चार बजे के करीब भारी वाहन ट्रांसफर काउंटर में केबिन के दरवाजे खुले थे। उसमें लिपिक और उगाही की जिम्मेदारी निभाने वाला चेला खड़ा था।
ऊपर की जेब में रखता रहा नोट
एक दलाल रैक में सरकारी फाइलों को उठाता और रखता दिख रहा था। इसी दौरान एक दलाल फाइल के साथ लिपिक के चेले को 500-500 के नोट देता नजर आता है। इस दौरान दलालों की भीड़ लगी थी। दूसरा दलाल किसी फाइल की चर्चा करते हुए 500-500 के नोट देता है। लिपिक का चेला रुपये को देखता और ऊपर की जेब में रखता रहा।
लाइसेंस, फिटनेस, परमिट व ट्रांसफर के लिए देने होते रुपये
एआरटीओ दफ्तर में कोई भी आवेदक सीधे काम नहीं करा सकता। लाइसेंस, फिटनेस, परमिट, ट्रांसफर समेत सभी कामों के बदले दलालों के जरिए ही पैसा देना पड़ता है। सीधे पहुंचने पर फाइलों में कमी निकालकर बार-बार चक्कर लगवाए जाते हैं।
केबिन में घुसने पर दे चुके चेतावनी, अब करेंगे कार्रवाई: एआरटीओ प्रशासन
एआरटीओ प्रशासन कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि लिपिक की केबिन में कोई भी बाहरी नहीं घुस सकता। यदि अंदर खड़े होकर रुपये का लेन-देन और फाइलों को उठाया जाता है, तो अपराध है। वह इस मामले में कठोर कार्रवाई करेंगे।