घटनास्थल से लूटी गई राइफलें आदि सामान बरामद
आरोपियों ने सिपाही हरिकिशोर, अशोक कुमार व मुरलीधर की राइफलें, कारतूस, टार्च और घड़ियां छीन लीं। इसके बाद सिपाही हरिकिशोर व मुरलीधर को पकड़कर ओमप्रकाश की बैठक में बंधक बना लिया। इसी बीच कांस्टेबल शेष कुमार तिवारी व अशोक कुमार भाग निकले, लेकिन पीछा कर रही भीड़ ने बाद में शेष कुमार पीट-पीटकर मार डाला। इसकी रिपोर्ट अलग से लिखाई गई। रात करीब 12 बजे पुलिस बल ने बंधक बनाए गए सिपाही हरिकिशोर व मुरलीधर को मुक्त कराया और घटनास्थल से लूटी गई राइफलें आदि सामान बरामद किया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की।
सजा पर सुनवाई 28 नवंबर को
विवेचक ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर रामबाबू, रामदीन, बादाम सिंह, रामरतन, रुकमंगल, अमर सिंह, रामवीर, देशराज, बरजोर व हरीशचंद्र को दोषी पाया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान ओमप्रकाश, सियाराम, सौदान सिंह, तुलाराम, वेदराम, रामचंद्र, रामऔतार व रामनरेश की मृत्यु हो गई। विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र शैलेंद्र सचान ने सभी की जमानत निरस्त करते हुए जेल भेजने का आदेश दिया। सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 28 नवंबर की तारीख तय की।