कुछ समय पहले बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से तबाह हुए किसानों के साथ लगता है सरकार ने मजाक शुरू कर दिया है। दरअसल किसानों को सब्सिडी के नाम पर जो भी लाभ दिया जा रहा है, उसे इस बार ऑनलाइन सिस्टम से जोड़कर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है, लेकिन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के लिए कोई व्यवस्था ही नहीं की है।
नतीजा देखिए,किसान सब्सिडी वाले धान का बीज खरीदने से पहले रजिस्ट्रेशन के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं। ‘अमर उजाला’ ने कुछ स्थानों पर जाकर पड़ताल की तो ऑनलाइन योजना की हकीकत सामने आई। शासन ने एक जून से कृषि विभाग की योजनाओं को ऑनलाइन कर दिया है, लेकिन इसके संचालन के लिए विभाग के पास न तो कंप्यूटर हैं और न इसकी तकनीकी जानकारी रखने वाले कर्मचारी। नई व्यवस्था में जरूरी है कि जिस किसान ने अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है, उसी को छूट का लाभ मिलेगा।
सवाल यह है कि जिन किसानों को किसी भी योजना का आवेदन फार्म भरने में दिक्कत आती है, वे ऑनलाइन सिस्टम से अपने को किस तरह जोड़ पाएंगे। शासन से कहा गया था कि किसानों के लिए हर ब्लाक में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था रहेगी, लेकिन कहीं कुछ भी नहीं है।
जिला कृषि अधिकारी नरोत्तम कुमार ने बताया कि कहीं भी एक भी कंप्यूटर नहीं है। हम लोग किसी तरह मैनेज कर रहे हैं। पहली बार ऑनलाइन सिस्टम शुरू किया गया है, जिससे काफी दिक्कत आ रही है। किसानों से अपील की गई है कि वे अपने बैंक खाते, जमीन संबंधी और स्थानीय पते संबंधी कागजात की कॉपी ब्लाक में जाकर जमा करा दें, फिर एक एक करके किसी तरह साइबर कैफे या फिर जिला मुख्यालय लाकर उनका रजिस्ट्रेशन कराने की कोशिश की जा रही है।