नहरों, माइनरों की कटान ने पिछले एक पखवारे में सैकड़ों बीघा खेत जलमगभन कर
नुकसान पहुंचाया है। नहर विभाग की लापरवाही के चलते किसानों को हुए नुकसान
की भरपाई कैसे होगी। वहीं खेतों में जलभराव किसानों के लिए परेशानी का सबब
बना हुआ हैं।
नहर, माइनर व रजबहे फटने की घटनाओं पर नजर डाले तो
डेरापुर के मुंगीसापुर कस्बे के निकट कुछ दिन पूर्व रजधान रजबहे की बंबी फट
जाने से सैकड़ों की बीघा जलमगभन हो गई थी, जिसमेें लगभग 100 बीघा खड़ी फसल
पर पानी का कहर बनकर टूटा था।
गांव के किसान शिवकुमार, शिववीर, राजन,
रामऔतार, पप्पू, राजू समेत 18 किसानों की फसलें तबाह हुई थी। यहां दूसरे
दिन अधिशाषी अधिकारी टीकाराम राजपूत ने कर्मचारियों को भेज बंबी कटान दूर
कराई थी।
13 जनवरी को शिवली क्षेत्र में छोटी राम गंगा नहर पर पानी का
दबाव बढ़ जाने से कमजोर बंबी की पटरी अचानक फट गई, जिससे 25 बीघा क्षेत्रफल
में बंबी का पानी भर गया, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ गया।
शिवली
क्षेत्र के ही आंट रजबहा से होकर निकलने वाली माइनर ने 17 जनवरी की रात
तबाही मचा दी।
कमजोर बंबी के फट जाने से लगभग 125 बीघा फसल जलमगभन हो गई।
यहां एक तालाब के सूखा होने से किसानों का काफी नुकसान बच गया था। बंबी
फटने से क्षेत्र के किसान सुरेश सिंह, हाकिम सिंह, उदयवीर सिंह समेत अन्य
किसानों को गेहूं, सना, सरसों, मटर, फूलगोभी, पत्तागोभी आदि का नुकसान
उठाना पड़ा।
18 जनवरी की रात सरवनखेड़ा विकासखंड के बिल्टी व अहिरानी गांव
के बीच माइनर की पटरी फटने से लगभग एक सैकड़ा क्षेत्रफल जलमग्न हो गया। खेत
में पानी भर जाने से दो दर्जन से अधिक किसानों की नौबत आ गई। फिलहाल किसान
यहां खेतोें में भरे पानी को निकालने में जुटे हुए हैं।