देश के लिए अनाज, फल, सब्जी उगाने वाले आज एक और किसान ने मौत को गले लगा लिया। वो दुनिया छोड़कर यूं चला गया कि उसका हाल तक किसी ने नहीं जाना और शायद ही कोई जाने। उसे खोने का दर्द हमारे सीने में न हो लेकिन इस मौत पर उसके परिवार में सबकी आंखें जरूर नम हो गई।
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उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में स्वासामाफ गांव निवासी किसान हरीदास के पास 20 बीघे खेत हैं। हरीदास के चार पुत्र हैं। कुछ दिन पहले हरीदास ने जमीन का बंटवारा करते हुए सभी पुत्रों को 4-4 बीघा जमीन दे दी। भूमि का बंटवारा होने से हरीदास का सबसे छोटा पुत्र जयसिंह (35) परेशान रहने लगा।
पिता हरीदास ने बताया कि जयसिंह के दोनों पुत्र चरखारी में मामा के यहां रहकर पढ़ाई कर रहे है। जुलाई में दोनों बच्चों की फीस जमा करने के लिए जयसिंह ने तीन बोरा गेहूं बेचा था। गेहूं बेचने पर उसे 5 हजार की रकम मिली। लेकिन यह उनकी फीस के लिए प्रयाप्त नहीं थी। इन पैसों को और बढ़ाने के लिए उसने ये पैसे जुएं में दाव पर लगा दिया। लेकिन वह सारे पैसे जुएं में हार गया।
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शनिवार की शाम जयसिंह घर से निकल गया। सुबह जब ग्रामीण खेतों की ओर गए तो जयसिंह का शव बेरी के पेड़ पर फांसी के फंदे पर झूलता पाया गया। सूचना पर उपजिलाधिकारी चरखारी मृदुल चौधरी, तहसीलदार सुबोधमणि शर्मा, कोतवाली प्रभारी सतीषचंद्र शुक्ला पुलिस फोर्स के साथ मौके पर जाकर जांच की। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
आर्थिक तंगी होने की कोई बात सामने नहीं आई है। परिजनों व ग्रामीणों ने जुएं में पैसे हारने की बात बताई है। कुछ दिन पहले भूमि का बंटवारा हुआ था। परिजनों को आर्थिक सहायता दिलाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। मृदुल चौधरी, उपजिलाधिकारी चरखारी
-बच्चों की फीस जमा करने के लिए बेचा था तीन बोरा गेहूं
-एसडीएम व तहसीलदार ने मौके पर पहुंच की जांच