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बच्चों को छोड़ प्रेमी संग भागी पत्नी, ससुरालवालों के खिलाफ लिखाया दहेज का मुकदमा, अब हुआ फैसला

Thu, 03 Jan 2019 03:18 PM IST
gaurav gaurav यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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यूपी के कानपुर में दहेज उत्पीड़न के मामले में फंसे पति समेत सात ससुरालीजनों को अपर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट सप्तम विराट कुमार श्रीवास्तव ने आरोप मुक्त करार दिया है। चांदपुर फतेहपुर निवासी छक्कू गुप्ता ने अपनी बेटी नीलम की शादी जूही सफेद कालोनी, कानपुर निवासी सुशील गुप्ता के साथ जनवरी 2006 में की थी। दो बच्चे हुए। 2014 में नीलम ने दहेज में 20 हजार रुपये नगद व मोटरसाइकिल की मांग पूरी न होने पर ससुरालीजनों द्वारा प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कोर्ट में सात ससुरालीजनों के खिलाफ परिवाद दर्ज करा दिया।
 
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नीलम के प्रार्थना पत्र और गवाहों के बयान के आधार पर कोर्ट ने सभी ससुरालीजनों को नवंबर 2014 में तलब कर लिया। सुशील ने कोर्ट में हाजिर होकर अधिवक्ता अहमद अली खान के माध्यम से फरवरी 2015 में जवाब दाखिल किया। इसमें कहा कि नीलम बच्चों और ससुराल को छोड़कर प्रेमी के साथ नकदी व जेवरात लेकर फरार हो गई है। वह प्रेमी के साथ ही रह रही है। सुशील ने भी पत्नी और प्रेमी के खिलाफ एक परिवाद दर्ज कराया था।
 
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नीलम के पिता ने भी थाने में लड़की के भाग जाने की सूचना दी थी। नीलम ने जवाब में सुशील के तर्कों को खारिज करते हुए ससुरालीजनों द्वारा पिता से दबाव में थाने में भाग जाने की शिकायत करने की बात कही गई। साथ ही पिता द्वारा थाने में दिए एक दूसरे प्रार्थना पत्र की प्रति भी दाखिल की जिसमें कहा गया कि पति-पत्नी में झगड़ा होने के कारण नीलम उनके पारिवारिक व्यक्ति के साथ चली गई थी।
 

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हालांकि पुलिस की जांच रिपोर्ट में भी नीलम के प्रेमी के साथ रहने की बात कही गई थी। सुशील द्वारा हाईकोर्ट का आदेश भी दाखिल किया गया था। दोनों पक्षाें को सुनने और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने पति सुशील समेत सात ससुरालीजनों को दहेज उत्पीड़न व मारपीट के आरोपों से मुक्त करार दिया।
 
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घरेलू हिंसा का परिवाद भी हो चुका खारिज 
नीलम ने 2014 में ही घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत भी ससुरालीजनों के खिलाफ एक परिवाद दर्ज किया था। सुशील के अधिवक्ता अहमद अली खान ने बताया कि पिता के थाने में दिए प्रार्थना पत्र, पुलिस रिपोर्ट से प्रेम प्रसंग के चलते नीलम द्वारा प्रेमी संग रहने की बात स्पष्ट हो जाने पर एसीएमएम 7 की कोर्ट ने ही 29 नवंबर 2017 को आदेश पारित करते हुए नीलम का घरेलू हिंसा का परिवाद भी खारिज कर दिया था।
 
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