रसूलाबाद (कानपुर देहात)। रसूलाबाद तहसील के भैंसाया में वर्ष 2022 में मेरठ के हस्तिनापुर में रह रहे बांग्लादेश से विस्थापित 63 परिवारों को बसाया गया। चार साल बीत जाने के बाद आज भी परिवारों को कई सुविधाओं की दरकार है। अब तहसील क्षेत्र के भैंसाया व ताजपुर तरसौली में 99 परिवारों को बसाया जाना है। इसके लिए कैबिनेट ने मुहर लगा दी है।
मेरठ के हस्तिनापुर क्षेत्र में फैक्टरी बंद होने के बाद यहां रहने वाले परिवारों के सामने जीविकोपार्जन का संकट उत्पन्न हो गया था। इसके बाद सरकार द्वारा इन्हें रसूलाबाद के भैंसाया में बसाया गया। यहां वर्तमान में बांग्लादेश से विस्थापित 63 परिवार रह रहे हैं। इन्हें रहने के लिए आवास, किसानी के लिए जमीन के साथ बिजली, पानी अन्य सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। यहां रह रहे परिवार के लोगाें में सुरज, विश्वनाथ, रामप्रकाश मृत्युंजय आदि का कहना है कि परिवार के लोगों को आज भी कई मूलभूत सुविधाएं की दरकार है।
बताया कि शुरुआत में सब कुछ ठीक रहा अब अनदेखी हो रही है। यहां बना पार्क बदहाल हो गया है। टंकी से आपूर्ति होने वाला पानी भी कभी-कभी गंदा आता है। परिवार के सभी यूनिट के नाम राशन कार्ड में दर्ज न होने पर पूरा राशन नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही रोजगार व स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कई समस्याएं बताई हैं। वहीं, खंड विकास अधिकारी विपुल विक्रम सिंह ने बताया कि टंकी से गंदा पानी आने को लेकर जल निगम को पत्राचार कर समस्या दूर कराई जाएगी। साफ सफाई को लेकर ग्राम प्रधान को नियमित सफाई कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। अन्य जो भी समस्याएं है, उनका शीघ्र निस्तारण कराया जाएगा।
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परिवार के सदस्य बाहर रहकर कर रहे नौकरी
सरकार की ओर से आवास योजना का लाभ देते हुए रहने के लिए जमीन तो दी गई लेकिन आजीविका के लिए उपजाऊ कृषि भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई। जो जमीन दी गई है वह ऊसर और बंजर है। जिस पर खेती करना बेहद कठिन है। कॉलोनी में स्कूल न होने के कारण बच्चों को एक किलोमीटर दूर पढ़ने जाना पड़ता है। रोजगार का कोई साधन न होने से कई परिवारों के बच्चे बाहर रहकर काम कर रहे हैं और घर खर्च भेज रहे हैं। - आरती मंडल, विस्थापित परिवार की सदस्य
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नहीं होती साफ सफाई, खेती करने में हो रही परेशानी
पानी की टंकी तो बनाई है लेकिन कई दिनों से गंदा पानी आ रहा है और कुछ घरों में तक अब तक पाइपलाइन भी नहीं पहुंची है। कॉलोनी का पार्क गंदगी से भरा है। सफाई कर्मचारी नहीं आते। कृषि भूमि ऊसर बंजर है। गड्ढों से भरी है जमीन पर फसल पैदा करने में परेशानी होती है। भूमि समतल न होने के कारण खेती नहीं हो पा रही है। अमृत सरोवर भी बदहाल है। - अनिल विश्वास, विस्थापित बांग्लादेशी
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कॉलोनी में मंदिर, स्कूल और बारात शाला अब भी नहीं
कॉलोनी में मंदिर, स्कूल और बारात शाला आज तक नहीं बन सकी है। पूजा के लिए महिलाओं को दो किलोमीटर दूर महेंद्र नगर स्थित दुर्गा मंदिर जाना पड़ता है। राशन कार्ड में भी कई परिवारों के सभी सदस्यों के नाम दर्ज नहीं हैं और कम राशन मिल रहा है। विस्थापितों ने खंड विकास अधिकारी व जिला प्रशासन को कई बार अवगत कराया लेकिन अब तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। - कुशल मंडल, विस्थापित परिवार की सदस्य
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भैसाया में 50 और ताजपुर में विस्थापित होंगे 49 परिवार
कानपुर देहात। ग्राम नंगला गोसाई, तहसील मवाना, जनपद मेरठ में निवासरत पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से विस्थापित 99 हिन्दू बंगाली परिवारों को रसूलाबाद तहसील क्षेत्र में बसाया जाएगा। रसूलाबाद के ग्राम भैंसाया में पुनर्वास विभाग के नाम अंकित 11.1375 हेक्टेअर भूमि में 50 परिवार और ग्राम ताजपुर तरसौली में पुनर्वास विभाग के नाम अंकित 10.530 हेक्टेअर भूमि में 49 परिवार को रहने के लिए जगह दी जाएगी। प्रति परिवार 0.50 एकड़ भूमि आवंटित कर पुनर्वासित किया जाना है। यहां विस्थापित होने वाले परिवारों को जिला प्रशासन मूलभूत सुविधाएं भी मुहैया कराएगा। इसके लिए जिला प्रशासन तैयारी कर रहा है। (संवाद)
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वर्जन...........
कुछ परिवार पहले से रहे रहे हैं। भवाना तहसील मेरठ से 99 परिवारों को रसूलाबाद तहसील क्षेत्र में विस्थापित किया जाना है। जमीन चिह्नित कर मेरठ जिला प्रशासन और राजस्व परिषद को रिपोर्ट भेज दी गई थी। कैबिनेट ने निर्णय ले लिया है। आगे के दिशा निर्देश मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। - कपिल सिंह, जिलाधिकारी