इस खबर को अमर उजाला ने शुक्रवार को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद आलाधिकारियों ने संज्ञान में लिया। सीओ स्वरूपनगर अजीत सिंह चौहान ने बताया कि कार आशीष के भाई तरुण की है। आशीष ने ही रायबरेली से पास बनवाया था। इसलिए उसको ही आरोपी बनाया गया है।
इसमें तरुण की भूमिका की जांच की जा रही है। अगर उसके खिलाफ साक्ष्य मिले तो कार्रवाई की जाएगी। पास बनवाने के मामले में जितेश की भूमिका नहीं मिली है। तरुण और आशीष ठेकेदारी का काम करते हैं। आशीष को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
इंस्पेक्टर ने किए खेल
स्वरूपनगर इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार पांडेय मौके पर भी गए थे। उन्हें पूरी घटना की जानकारी थी। इसके बावजूद जितेश व आशीष को थाने छोड़ दिया गया। कार से पास भी गायब हुआ। आलाधिकारियों को घटना की जानकारी भी नहीं दी। जब सर्किल ऑफिसर ने पूछा तो उनको भी गुमराह करते रहे। हैरानी की बात यह है कि अभी भी इंस्पेक्टर पर कार्रवाई नहीं की गई, सिर्फ खानापूरी को स्पष्टीकरण मांगा गया है।
स्वरूपनगर इंस्पेक्टर से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके बाद उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।
डॉ. अनिल कुमार, एसपी पश्चिम