रेलवे में फर्जी नौकरी कर रहे 13 युवकों के खुलासे के बाद दो और युवक सामने आए हैं। जो अप्रैल 2021 से सेंट्रल पर नौकरी कर रहे थे। छह जून को दोनों पांच दिन की छुट्टी लेकर घर गए थे। सोमवार को फिर नौकरी ज्वाइन करनी थी। शनिवार देर रात कानपुर आए तो मामला पता चला।
रविवार को वे जीआरपी थाने पहुंचे। पुलिस ने उन्हें गवाह बनाया है। जीआरपी के सामने पहुंचे गढ़वा, फरिंदा, महाराजगंज निवासी आकाश यादव और बैजनाथ का पुरवा, मऊ अइमा, प्रयागराज निवासी मोहम्मद शमीम ने बताया कि ठगों ने रेलवे में सुपरवाइजर की नौकरी देने के नाम पर एक-एक लाख रुपये वसूले थे। दो-दो लाख रुपये में सौदा हुआ था। ट्रेनिंग के बाद बाकी रकम देनी थी।
राकेश भट्ट परिवार समेत हुआ फरार
पुलिस ने ठग गैंग के सरगना रुद्र प्रताप ठाकुर के इटावा स्थित घर और पनकी स्थित ससुराल में छानबीन की लेकिन कुछ पता नहीं चला। जीआरपी की एक टीम सरगना के सहयोगी राकेश भट्ट के घर रुड़की में छापा मारने गई लेकिन वहां वह परिवार समेत फरार है, घर पर ताला लटका मिला है। जीआरपी प्रभारी अजीत कुमार सिंह ने बताया कि चार टीमें आरोपियों की धरपकड़ को चंदौली, हरिद्वार, रुड़की और इटावा को गई हैं पर किसी के हाथ आरोपी नहीं लगे हैं।
अरमान टूट गए
पीड़ित मोहम्मद शमी ने जीआरपी को बताया कि नौकरी ज्वाइन करने के बाद पहली बार घर गए थे। घर में सभी खुश थे। वापस आए तो पता चला कि सभी अरमान चकनाचूर हो गए हैं। अप्रैल से सुपरवाइजर का काम देख रहे थे। हाजिरी लेने वाले एजेंट शिवनारायण त्रिपाठी को छुट्टी की एप्लीकेशन दी थी।
ठगों का भंडाफोड़ होने के बाद जैसे जैसे लोगों को जानकारी हो रही है, सभी सामने आ रहे हैं। अभी 13 युवक फंसे थे और अब दो और ठगी का शिकार हुए हैं। मामले से पर्दा उठ रहा है। गिरोह का सरगना रुद्र प्रताप के अलावा अनुज अवस्थी, राकेश भट्ट, अभिषेक और मोहित भी जल्द पकड़ में होंगे।- कमरुल हसन खां, सीओ, जीआरपी