आईआईटी में निकाला गया था सीएए के विरोध में मार्च
- फोटो : अमर उजाला
आईआईटी कानपुर में फैज अहमद फैज की कविता की जांच का मामला शांत नहीं हो रहा है। आईआईटी प्रशासन ने साफ किया है कि नज्म सांप्रदायिक है या नहीं, इसके अलावा हर बिंदु पर जांच होगी।
वायरल वीडियो पर कविता सुनने के बाद कुछ छात्रों ने इसका विरोध भी किया था और तत्काल सभा खत्म करने की बात कही थी। जामिया छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में आईआईटी कानपुर में प्रदर्शन हुआ था।
छात्रों ने बिना अनुमति शांति मार्च निकला और ओएटी में सभा की थी। सभा के दौरान छात्रों ने फैज अहमद फैज की कविता भी पढ़ी। हालांकि, उसी सभा में कविता का विरोध भी छात्रों ने किया और इसे गलत ठहराया।
छात्रों की इस सभा का वीडियो वायरल होने पर आईआईटी निदेशक ने मामले की उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया और जांच के आदेश दिए। मामले ने तब तूल पकड़ा जब संस्थान ने नज्म के हिंदू विरोधी होने पर सवाल उठाए।
सोशल मीडिया में आईआईटी को ट्रोल किया गया। इस पर आईआईटी ने शुक्रवार को जारी रिलीज में स्पष्ट किया है कि संस्थान द्वारा गठित जांच समिति के मुद्दे में फैज अहमद फैज की नज्म सांप्रदायिक है या नहीं, यह शामिल नहीं है।
समिति ओपन एयर थिएटर (ओएटी) के साथ साथ कुछ सोशल मीडिया पोस्ट, लेख, ब्लॉग, और सभा के दौरान छात्रों के वर्ग द्वारा भड़काऊ, अपमानजनक और डराने वाली भाषा का उपयोग करने की शिकायतों की जांच कर रही है।