पड़ोस के राम किशन राठौर और बिंदेश्वरी ने बताया कि पिता प्रकाश की बैंक की नौकरी का लंबा वक्त फैजाबाद में ही बीता है। इस कारण प्रकाश के दोनों बेटों मनीष और आशीष की पढ़ाई भी फैजाबाद में ही हुई। आशीष की मां कांती देवी भी फैजाबाद में ही शिक्षिका थी, जिनका कुछ समय पूर्व ही देहांत हो चुका है। पिता प्रकाश का अयोध्या के राम मंदिर से काफी लगाव है, जिस कारण ही वे बैंक से सेवानिवृत्त होने के बाद भी अपने फैजाबाद के ही मकान में अकेले रह रहे हैं। यही वजह है कि बुधवार रात तक अभी किसी को यह जानकारी नहीं हो सकी कि कैप्टन का पार्थिव शरीर फैजाबाद जाएगा या फिर सरसई उनके गांव पहुंचेगा। इधर, सरसई गांव निवासी बुजुर्ग रामबाबू मिश्रा ने बताया कि सालों पहले गुप्ता परिवार अपनी जमीन बेचकर गांव से चला गया है। दो भाई उरई में और एक भाई फैजाबाद में रहता है।
सुबह जिस वक्त से मिग-21 के हादसे के शिकार होने और उसमें जान गंवाने वाले कैप्टन आशीष के बारे में जानकारी निकली, तभी से गुप्ता परिवार से जुड़े हर व्यक्ति की आंखे टीवी सेट पर ही लगी रही कि कहीं से कोई और पुख्ता जानकारी मिल सके। टीवी के अलावा परिवार के कई लोग मोबाइल पर भी घटना के बारे में जानकारी करते नजर आए।
भले ही आशीष के परिजनों और मोहल्ले वालों को हादसे की जानकारी सुबह सवा ग्यारह से लेकर दोपहर एक 12 बजे तक हो गई थी लेकिन पुलिस प्रशासन के किसी भी अधिकारी और किसी भी जनप्रतिनिधि व नेता ने कैप्टन के घर पहुंचने की जरूरत महसूस नहीं की। इससे भी इलाकाई लोगों में नाराजगी रही।