कानपुर। लक्ष्य की राह में आने वाली चुनौतियों से घबराने के बजाय हनुमान के जीवन से प्रेरणा लेकर उनका सामना करना चाहिए। पढ़ाई, प्रेम या नौकरी में असफलता जिंदगी का अंत नहीं है। यह बातें शुक्रवार को मर्चेंट्स चैंबर सभागार में श्री रामलीला सोसाइटी परेड की ओर से आयोजित श्रीराम कथा में मंदाकिनी दीदी ने कहीं।
उन्होंने कहा कि माता सीता की खोज के दौरान हनुमान ने अनेक बाधाओं का सामना किया और अपने साहस, बुद्धि व सूझबूझ से सफलता हासिल की। आज असफलता मिलने पर कई युवक-युवतियां अवसाद में चले जाते हैं और कुछ आत्महत्या जैसा कदम तक उठा लेते हैं। यह किसी समस्या का समाधान नहीं है। जीवन में कितनी भी कठिन परीक्षा आए, मनुष्य को धैर्य नहीं खोना चाहिए।
मंदाकिनी दीदी ने कहा कि सीता की खोज में हनुमान समुद्र पार कर लंका पहुंचे। रास्ते में सुरसा ने उनकी परीक्षा ली तो उन्होंने बल के बजाय बुद्धि और युक्ति का सहारा लिया। अशोक वाटिका में माता सीता से भेंट के बाद उन्होंने अपना पराक्रम भी दिखाया। इससे सीख मिलती है कि परिस्थितियों के अनुसार विवेक और सामर्थ्य दोनों का उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि रामचरितमानस को केवल पाठ तक सीमित रखने के बजाय उसके संदेशों को जीवन में उतारना चाहिए। सुंदरकांड में सुंदर शब्द की वास्तविक सार्थकता समझ में आती है। भौतिक सौंदर्य क्षणभंगुर है, जबकि शाश्वत सौंदर्य मनुष्य को देह से देही की ओर ले जाता है। कथा में राजीव गर्ग, आलोक अग्रवाल, अमरनाथ मेहरोत्रा समेत अन्य भक्त मौजूद रहे।