पांचवें रोगी राजाराम (70) की आंखों से लिए सैंपल में सिर्फ मवाद की कोशिकाएं मिली हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने कल्चर सेंसिटिविटी रिपोर्ट दी है। मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने कल्चर टेस्ट में सूडोमोनास बैक्टीरिया मिलने की पुष्टि की है। स्वास्थ्य विभाग ने हॉस्पिटल के ऑपरेशन थिएटर के सैंपल भी विभाग को जांच के लिए दिए हैं। ओटी सैंपल की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। इसके पहले 22 नवंबर को जांच टीम ने ओटी का निरीक्षण करके रिपोर्ट देखी थी। सात नवंबर की ओटी सैंपल रिपोर्ट जीरो बैक्टीरिया रही है। सीएमओ डॉ. रंजन का कहना है कि नई रिपोर्ट आने के बाद फाइनल रिपोर्ट तैयार होगी।
नेत्र रोग वार्ड में संक्रमण का खतरा
मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद आंखें खराब होने वाले पांच रोगियों को हैलट के नेत्र रोग विभाग के वार्ड में रखा गया है। इन्हें सूडोमोनास बैक्टीरिया के संक्रमण की पुष्टि के बाद वार्ड में घबराहट पैदा हो गई है। डॉक्टरों का कहना है कि यह संक्रमण वार्ड में भर्ती दूसरे रोगियों में भी फैल सकता है। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान का कहना है कि इन रोगियों को एक तरफ रखा गया है। वैसे संक्रमण फैलने का खतरा तो रहता ही है। इन्हें दो-तीन दिन में डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। रोगी ऑपरेशन कराने से मना कर रहे हैं। कुछ की आंखों का गोला भी निकालना पड़ सकता है। वैसे आंखों की सफाई जरूरी है।
ग्राम निगेटिव बैक्टीरिया है सूडोमोनास
सूडोमोनास ग्राम निगेटिव बैक्टीरिया है। अस्पतालों से लगने वाले संक्रमण में यह बैक्टीरिया भी रोगियों में निकलता है। इसका संक्रमण खतरनाक माना जाता है। इस बैक्टीरिया पर ज्यादातर एंटीबायोटिक असर नहीं करती हैं। ओटी के अलावा वार्डों, अस्पतालों के टॉयलेट आदि से भी यह संक्रमण मिल सकता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मधु यादव ने बताया कि अस्पताल के अलावा इसका संक्रमण बाहर भी मिल सकता है। अस्पतालों के संक्रमण के केस में यह बैक्टीरिया भी निकलता है।