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Kanpur: विशेषज्ञ बोले- बच्चों के साथ अभिभावक बिताएं समय तो दूर होगी मोबाइल की लत

Sun, 23 Mar 2025 11:35 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

मेरी उलझन कार्यक्रम में सबसे ज्यादा बच्चों के माेबाइल की लत के पाठकों ने सवाल किए। विशेषज्ञों ने सवालों के जवाब दिए। 
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सवालों के जवाब देते डॉ. नरेश चंद्र व डॉ. कृतिका चावला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरा बच्चा हर समय मोबाइल देखता रहता है, न दो तो चीखता-चिल्लाता है। खाना छोड़ देता है। क्या करूं, कुछ ऐसी ही समस्याएं लोगों ने अमर उजाला के विशेष कॉलम ''मेरी उलझन'' के तहत फोन पर बताईं। मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र के मनोवैज्ञानिक डॉ. नरेश चंद्र और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कृतिका चावला ने इनके सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ अभिभावक अगर समय बिताएं तो खुद ही मोबाइल की लत दूर हो जाएगी। हालांकि गोपनीयता को देखते हुए हम सवाल पूछने वाले पाठकों के नाम नहीं दे रहे हैं।
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- मेरा दस साल का बेटा मोबाइल देखता रहता है, मना करो तो रोता है। क्या करें?
बच्चों से मोबाइल की लत दूर करने के लिए दो चीजें बहुत जरूरी हैं। पहला खुद उनके सामने मोबाइल का प्रयोग न करें। दूसरा बच्चों के साथ समय बिताएं। उनके साथ खेलें। उनके साथ पढ़ें। उन्हें प्रेरणादायी या नैतिक मूल्यों पर आधारित कहानियां सुनाएं।

- प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा हूं, देर रात तक पढ़ता हूं और उसके बाद नींद नहीं आती, उलझन होती है क्या करूं?
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जरूरी है कि अपना टाइम टेबल सेट करें। इसमें सात से आठ घंटे की नींद जरूर लें। इसके अलावा योग और व्यायाम भी करें। सकारात्मक सोचें। हर रोज सुबह उठते ही और सोने से पहले ये खुद से कहें कि मेरा चयन अवश्य होगा। मैं अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा हूं। मुझे सफलता अवश्य मिलेगी।
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- पत्नी के साथ मेरा झगड़ा होता रहता है। उसके बाद पूरा दिन उलझन होती है। नकारात्मक विचार आते हैं, क्या करूं?
जब हम साथ में रहते हैं तो झगड़ा-प्रेम लगा रहता है, लेकिन ये थोड़ी देर के बाद सही हो जाता है। अगर ये बहुत बढ़ गया है। बात-बात पर टकराव है तो आपको ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके लिए आप झगड़े की वजह खोजें और एक-दूसरे से बात करें। जब भी झगड़ा हो तो तुरंत जवाब न दें। थोड़ी देर रुकें, सोच-विचार कर ही कुछ कहें। क्योंकि कई बार लोग गुस्से में गलत कह देते हैं। बाद में पछतावा होता है।

- हम दोनों पति-पत्नी नाैकरी करते हैं। बेटी को केयर टेकर के पास छोड़कर जाना पड़ता है। साथ में मेरी मां भी रहती है, फिर भी ऐसा लग रहा है कि मोबाइल उसे पाल रहा है। अब वो हमसे भी बात नहीं करती है, क्या करें?
ऐसे बच्चे सोडोऑटिज्म के शिकार हो जाते हैं। अगर आपने इसे नहीं रोका तो बात आगे बढ़ सकती है। इसमें बच्चा कुछ और नहीं करता है, सिर्फ मोबाइल देखता है। उसे बाकी लोगों से कोई मतलब नहीं रहता है। न बात करना, न हंसना, न रोना, न खेलना कुछ भी नहीं। इसके लिए आपको फौरन उसके मोबाइल के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने की जरूरत है। वह रोए तो थोड़ा सख्ती बरतें और उसे रोने दें। वो बच्ची है, थोड़ी देर में शांत हो जाएगी।

मेरी मां की उम्र 55 साल है। कुछ दिन पहले गिर पड़ीं थीं। इसके बाद से बहकी-बहकी बातें करती हैं... कि झगड़ा हो रहा है, पुलिस आ गई, घर में चोर आ गया है। क्या करूं?
आपकी मां को साइकॉसिस हुआ है। इसके लिए आप अपनी मां को जल्द ही मेडिकल कॉलेज ओपीडी में लेकर आएं। साइकॉसिस एक मानसिक बीमारी है, जिसमें रोगी बहकी-बहकी बातें करता है, डरता है, शक करता है कि जादू टोना कर दिया आदि। ऐसे में तुरंत ही चिकित्सक को दिखाएं।

सोडो ऑटिज्म में बच्चा मोबाइल का हो जाता है लती
मेरी उलझन सत्र में सबसे ज्यादा सोडो ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों के बारे में फोन आए। विशेषज्ञों ने बताया कि इससे ग्रसित बच्चे को कुछ और समझ नहीं आता है। उनका हंसना, बोलना सभी कुछ मोबाइल के साथ चाहता है। उनकी मोबाइल से ही सुबह होती है और मोबाइल देखते-देखते सो जाते हैं। ऐसे बच्चों के अभिभावक इसे गंभीरता से लें और बच्चे की मोबाइल की लत को दूर करें।

 
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गोल्डन टिप्स
नियमित दिनचर्या बनाएं।
हर रोज व्यायाम करें।
स्लीप हाइजीन यानि सोने से एक घंटा पहले मोबाइल या लैपटॉप का प्रयोग बंद कर दें।
शाम को चार-पांच बजे के बाद चाय, कॉफी आदि न पीएं।
दोपहर में 30 मिनट या उससे कम ही नींद लें।
पैक्ड फूड छोड़कर हेल्दी डाइट लें।
हमेशा सकारात्मक सोचें और हर घटना में सकारात्मकता ढूंढ़े।
सोने से पहले अपने लक्ष्य को याद करें और सोचें कि जरूर पूरा होगा।
बच्चों से दोस्ताना व्यवहार रखें।
बच्चों के साथ समय बिताएं।
सामने वाले को हमेशा सोचसमझ कर जवाब दें।
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