प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपदा को अवसर में बदलने की बात कह रहे हैं लेकिन जिले के पांच बीडीओ ने इस आपदा में भी गड़बड़झाला कर डाला। सात विकास खंडों का भार संभाले पांच बीडीओ ने नियमों को दरकिनार कर लगभग साढ़े नौ करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता की है।
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केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत कराए जाने वाले कार्यों के सामग्री अंश पर भुगतान के लिए दिए गए बजट से पूर्व में हो चुके नाली खड़ंजे जैसे कार्यों का भुगतान कर दिया गया।
कोरोना संकट के कारण प्रवासी मजदूरों को उनके गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने की कवायद में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान की शुरुआत की गई थी। प्रदेश के 31 जिले ही इस अभियान के लिए केंद्र सरकार ने चुने थे।
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इन जनपदों में प्रवासी मजदूरों को मनरेगा से रोजगार उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी। जिलाधिकारी पुलकित खरे, सीडीओ निधि गुप्ता वत्स इस योजना की समीक्षा भी सप्ताह में एक बार जरूरी करते हैं।
शासन ने उक्त योजना के तहत मनरेगा से होने वाले कार्यों के सामग्री अंश के भुगतान के लिए अलग से बजट की व्यवस्था की थी। स्पष्ट निर्देश थे कि इस बजट से अभियान के कार्यों के अलावा किसी भी कार्य के सामग्री अंश का भुगतान नहीं किया जाएगा। लेकिन सात ब्लाकों में तैनात पांच खंड विकास अधिकारियों ने नौ करोड़ 43 लाख 49 हजार 135 रुपये का भुगतान पूर्व में हो चुके नाली खड़ंजे जैसे कार्यों के लिए कर दिया।
ये थे निर्देश
शासन ने निर्देश दिए थे कि गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत आंगनबाड़ी भवन के निर्माण, पौधरोपण, उद्यानीकरण, जल संरक्षण एवं जल संचयन, फॉर्म पांड, पशु शेड, गोट शेड, पोल्ट्री शेड, वर्मी कंपोस्ट, ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के कार्य मनरेगा से प्राथमिकता से कराए जाएंगे। उद्देश्य था कि जिले में अधिक से अधिक प्रवासी मजदूरों को उक्त कार्यों के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
सामग्री अंश पर भुगतान को मिले थे 338.64 करोड़ रुपये
गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत कराए जाने वाले कार्यों में प्रवासी मजदूरों को प्राथमिकता दी जा रही है। भुगतान न अटके, इसलिए शासन ने उक्त कार्यों के सामग्री अंश पर होने वाले खर्च का भुगतान करने के लिए जनपद को 338.64 करोड़ रुपये मनरेगा के तहत पहले ही उपलब्ध करा दिए थे।
ये रहा बीडीओ का कारनामा
आला अफसरों ने खूब बैठकें कीं और सख्त नसीहत और निर्देश भी मातहतों को दिए। बावजूद इसके पांच खंड विकास अधिकारियों ने न तो नियमों का पालन किया और न ही अफसरों के निर्देशों का। गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत कराए जाने वाले कार्यों के सामग्री अंश पर भुगतान के लिए मिले बजट को बावन, भरावन, भरखनी, हरियावां, शाहाबाद, टड़ियावां और टोडरपुर विकास खंडों में पूर्व में कराए जा चुके इंटरलॉकिंग, सीसी रोड, नाली, खड़ंजा आदि कार्यों के सामग्री अंश पर खर्च कर दिया गया। इनमें बावन बीडीओ रोहिताश्व कुमार, भरावन में सुधीर कुमार, भरखनी में विद्या शंकर कटियार, हरियावां और टड़ियावां में संध्या रानी और शाहाबाद व टोडरपुर में बीडीओ ऋषिपाल सिंह शामिल रहे।
विकास खंड इतना किया भुगतान
शाहाबाद 50473198 रुपये
भरखनी 13789023 रुपये
बावन 5233280 रुपये
भरावन 3956852 रुपये
हरियावां 7743417 रुपये
टडिय़ावां 4257476 रुपये
टोडरपुर 8895889 रुपये
तो कमीशन से इतना प्यार
अधिकांश ग्राम प्रधानों का मनरेेगा से कराए जाने वाले कार्य का भुगतान कमीशन देने के बाद ही होता है। कमीशन उसी को मिलता है जो भुगतान करता है। आठ से दस फीसदी कमीशन पर एफटीओ लगाने से पहले या बाद में दिए जाने की चर्चा हर किसी की जुबां पर है। लगभग साढ़े नौ करोड़ रुपये का भुगतान सात ब्लाकों में हुआ है। सबसे अधिक भुगतान पांच करोड़ रुपये भी ज्यादा का शाहाबाद ब्लाक में हुआ है तो दूसरे नंबर पर भरखनी विकास खंड है।
तीन दिन में जवाब न मिला तो शासन को लिखेंगे: मनरेगा उपायुक्त
मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल ने बताया कि गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत होने वाले कार्यों के सामग्री अंश के भुगतान के लिए मिले बजट से ग्राम पंचायतों के नाली खड़ंजे, इंटरलॉकिंग, सीसी रोड के सामग्री अंश का भुगतान किए जाने का मामला जानकारी में है। संबंधित सात विकास खंडों के बीडीओ से 24 जुलाई को स्पष्टीकरण तलब किया गया था। किसी ने जवाब नहंीं दिया है। शुक्रवार को फिर सभी बीडीओ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। तीन दिन में जवाब न मिलने पर कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाएगा।