तीन-चार साल पहले मिला कोरोना का घाव अब हृदय को दांव दे रहा है। कोरोना का हृदय के कंडक्शन बंडल पर दुष्प्रभाव आया था। इसमें धीरे-धीरे खराबी बढ़ रही है। इससे हृदय का विद्युत प्रवाह बाधित हो रहा है और हार्ट फेल की स्थिति आ जाती है। कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट ने ऐसे एक हजार रोगियों की स्थिति का अध्ययन किया है। इन रोगियों के लक्षणों का विश्व भर में हुए शोध के नतीजों से मिलान किया गया। इससे स्पष्ट हुआ कि यह हृदय पर कोरोना के दुष्प्रभाव का असर है।
हृदय के कंडक्शन टिश्यू प्रभावित होने से रोगी की हृदय गति अनियंत्रित रहती है। गड़बड़ी अधिक होने से रोगी की अचानक मौत हो जाती है। कुछ रोगी अस्पताल तक पहुंच जाते हैं। कार्डियोलॉजी ने इमरजेंसी में आए रोगियों का अध्ययन किया। इंस्टीट्यूट के निदेशक एवं प्रोफेसर डॉ. राकेश कुमार वर्मा ने बताया कि कोरोना के हृदय पर दुष्प्रभाव पड़ने संबंधी हुए शोधों के नतीजे आ रहे हैं। इनमें कोरोना के दुष्प्रभाव के साक्ष्य मिल रहे हैं। इंस्टीट्यूट में आ रहे रोगियों की स्थिति का इन शोध के साक्ष्यों से मिलान किया जाता है।
डॉ. वर्मा ने बताया कि कंडक्शन बंडल हृदय का ट्रांसफार्मर कहलाता है। इससे हृदय में विद्युत प्रवाह संचालित होता है। कंडक्शन टिश्यू विद्युत करंट पैदा करते हैं। इन टिश्यू में स्पार्किंग भी होती रहती है। इस कारण विद्युत प्रवाह बाधित होता है और धड़कन अनियमित हो जाती है। विद्युत प्रवाह से संबंधित रोग को एरिथमिया कहते हैं।
डॉ. वर्मा ने कहा कि इस तरह के लक्षण लेकर रोगी बराबर आ रहे हैं। जो अस्पताल पहुंच जाते हैं, उनका जीवन बचा लिया जाता है। जिन मरीजों की अचानक हार्ट फेल होने से मौत हो जाती है, उनका कोई अध्ययन नहीं हो पाता। जिन लोगों को कोरोना हुआ है, उन्हें एक बार हृदय की संपूर्ण जांच करा लेनी चाहिए।