कानपुर-इटावा हाईवे पर अर्जुननगर के सामने मंगलवार रात सवा नौ बजे हुए हादसे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर मृतकों के परिजनों में बेहद रोष है। हादसे के बाद घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने सड़क पर मृत पड़े चालक राजेश और घायल योगेश को उठाया और जिला अस्पताल पहुंचा दिया।
यहां से योगेश को सैफई रेफर कर दिया गया, लेकिन पलटकर पुलिस ने जानने की कोशिश नहीं की कि पिकअप के नीचे कोई और तो नहीं दबा है। हालांकि पुलिस का दावा है कि योगेश के जानकारी देते ही बचाव कार्य में तेजी ला गई थी। वहीं मृतक के परिजनों का कहना है कि योगेश की जानकारी पर उनके परिजनों ने पुलिस से पहले ही घटनास्थल पर खोज बीन शुरू की थी और शवों को खोज निकाला।
दरअसल, पुलिस ने रात करीब 10:30 बजे राजेश और योगेश के परिजनों को हादसे की जानकारी दी। लेकिन पिकअप में सवार रहे पांच अन्य व्यापारियों के घर सूचना नहीं दी गई। हालांकि पिकअप से इटावा गए सभी व्यापारियों के परिजन अस्पताल पहुंच चुके थे।
अस्पताल में होश आने पर योगेश ने पुलिस से अपने अन्य साथियों के बारे में पूछा। तो पुलिस के होश उड़ गए। पुलिस ने मौके पर दो ही लोगों के मिलने की बात कही। योगेश ने बताया कि पिकअप में पांच और लोग भी थे। यह जानकारी पाकर मृतकों के परिवार के खेम सिंह, सर्वेश, सुधीर और मोहल्ला निवासी मोनू कठेरिया आदि दुर्घटनास्थल पर पहुंचे और पानी में लापता लोगों की खोजबीन शुरू की।
इधर पुलिस ने भी बचाव कार्य तेज कर दिया। परिवार के लोगों का कहना था कि करीब 12 बजे पांचों के शव निकाल लिए। इसके बाद थाने जाकर पुलिस को सूचना दी। परिवार के लोगों की सूचना पर पुलिस ने शवों को जिला अस्पताल पहुंचाया। उधर, पुलिस का दावा है कि शव पांच बजे निकाले गए।