देश के सबसे बड़े सूबे के मुखिया योगी आदित्य नाथ ने 10 जनवरी तक सड़कों पर घूमने वाले सभी आवारा जानवरों को गोशालाओं में रखने का आदेश दिया था लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों पर यह आदेश बेअसर रहा। जब प्रशासन ने आवारा जानवरों को रोकने में हाथ खड़े कर दिए तो किसानाें को अपनी फसल बचाने के लिए उनसे मोर्चा लेना पड़ा।
मौरावा के हिलौली ब्लाक के करदहा गांव के बाद अब देवमई ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने परेशान होकर एक सैकड़ा से अधिक मवेशियों को कंटीले तार की बाड़ बनाकर बंद कर दिया। ग्राम प्रधान ने ग्रामीणों के सहयोग से मवेशियों को चारा-पानी की व्यवस्था की है। एक निजी पशु चिकित्सक को मवेशियों की देखभाल में भी लगाया है। हिलौली ब्लाक की ग्राम पंचायत देवमई में ग्रामीणों ने शनिवार रात एक सैकड़ा से अधिक छुट्टा मवेशियों की घेराबंदी कर उन्हें गांव के किसान गंगाप्रसाद लोधी की बाग में कंटीले तार की बाड़ लगाकर बंद कर दिया।
डेमो पिक
ग्राम प्रधान रमेश यादव व पूर्व प्रधान बेबी के अलावा गांव के पथिक पांडेय, राकेश चौधरी, शिवगुलाम, रमेश तिवारी ने बताया कि गांव के सैकड़ों किसान छुट्टा जानवरों से परेशान थे। जिला प्रशासन ने समस्या से हल करने की कार्रवाई शुरू की तो उम्मीद नजर आई लेकिन एक पखवारा बीतने के बाद भी कोई हल होता नजर नहीं आया तो यह कदम उठाना पड़ा। ग्राम प्रधान ने बताया कि वह मवेशियों को चारे के लिए पुआल और पानी दे रहे हैं। मवई गांव में छुट्टा मवेशी बंद किए जाने की सूचना पर तहसील ओपी शुक्ला पहुंचे। ग्रामीणों से बात की। उन्होंने बताया किपशु आश्रय स्थल बनने के बाद इन मवेशियों को वहां शिफ्ट करा दिया जाएगा।
डेमो पिक
उन्नाव में पूरे शहर में छुट्टा मवेशियों का आतंक है और नगर पालिका का अभियान ठंडे बस्ते में है। नगर पालिका अधिकारियों का दावा कागजी साबित हो रहा है। मालूम हो कि 15 जनवरी तक पालतू पशुओं की टैगिंग करने के बाद नगर पालिका को छुट्टा मवेशियों को पकड़कर कांजी हाउस पहुुंचाने का अभियान शुरू करना था लेकिन पांच दिन बाद भी अभियान शुरू नहीं हो सका है। नगर पालिका के अधिकारी बताते हैं कि कुछ आवारा पशु पकड़े गए हैं और उन्हें कांजी हाउस पहुंचाया गया है। लेकिन कांजी हाउस के हालात नपा अधिकारियों के दावों से मेल नहीं खा रहे हैं। ईओ आरपी श्रीवास्तव ने बताया कि आवारा मवेशियों को कांजी हाउस पहुंचाने का काम चल रहा है। जल्द ही इसमें और तेजी लाई जाएगी।
पुरवा ब्लाक के पाशाखेड़ा ग्राम पंचायत में चरागाह की 17 बीघा जमीन पर गोशाला निर्माण कराया जा रहा है। इसी गांव के चंद्रभानु बाजपाई ने एसडीएम को शिकायती पत्र देकर जमीन अपनी बताई है। उनके मुताबिक उनकी पुश्तैनी है। और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। क्योंकि चकबंदी के समय निजी भूमि नंबरों को चरागाह में दर्ज कर दिया गया था। जानकारी होने पर न्यायालय में वाद दायर किया था। जिसपर स्थगन आदेश भी जारी है। किसान चंद्रभानु ने मांग की है कि जब तक न्यायालय कोई फैसला न दे निर्माण रोक दिया जाए। डीएम के निर्देश पर एसडीएम राजेंद्र कुमार ने निर्माण रोकने के आदेश दिए हैं। उधर, आवारा जानवरों को बंद करने के लिए नगर पंचायत पुरवा में दस दिन बाद भी श्मशान स्थल में समुचित व्यवस्था नहीं की जा सकी है। इससे मवेशियों को पकड़ने का अभियान शुरू नहीं हो सका है। ग्राम प्रधान निर्मला शुक्ला ने बताया कि ग्राम विकास अधिकारी ने पशु आश्रय स्थल का निर्माण रोकवा दिया है।
सफीपुर आवारा पशुओं की समस्या बरकरार है। परेशान कई गांव के लोगों ने एसडीएम को प्रार्थनापत्र देकर समस्या हल कर ने की मांग की है। ग्राम मखदूमनगर निवासी मुनेश्वर प्रसाद, मवईलाल गांव के महेश, उदसाह के महेश कुमार, मीठेपुर के रामदेव सिंह, रामकरण, देवगनमऊ के मोनू ने छुट्टा मवेशियों के खिलाफ अभियान चलाने और क्षेत्र में पशु आश्रय स्थल बनवाने की मांग की है।