रनियां (कानपुर देहात)। अमेरिका-इस्रारल व ईरान के बीच जारी युद्ध का असर जिले के औद्योगिक क्षेत्रों पर साफ दिखाई देने लगा है। विशेष रूप से रनियां और जैनपुर औद्योगिक क्षेत्रों में डिटर्जेंट बनाने वाली फैक्ट्रियों को कच्चे माल की आपूर्ति में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति के कारण न केवल उत्पादन में भारी कमी आई है बल्कि कच्चे माल की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों को संचालित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में उद्यमी भविष्य को लेकर चिंता जाहिर की है।
वर्तमान हालात ऐसे हैं कि इन औद्योगिक क्षेत्रों की लगभग 140 छोटी-बड़ी इकाइयों में उत्पादन क्षमता 70 से 80 प्रतिशत तक घट गई है। इसका सीधा असर कारोबार पर पड़ा है, जो अब तक 150 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। यह आंकड़ा स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।
मिडिल ईस्ट में 23 दिन से युद्ध चल रहा है। इसका असर कारोबारी गतिविधियों पर पड़ रहा है। समय बढ़ने के साथ-साथ परेशानियां भी बढ़ती जा रही हैं। उद्यमियों के अनुसार, डिटर्जेंट निर्माण में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख केमिकल लीनियर अल्काइल बेंजीन (एलएबी) की आपूर्ति खाड़ी देशों से होती है। युद्ध के कारण यह आपूर्ति प्रभावित हुई है। यह केमिकल मुख्य रूप से ईरान और सऊदी अरब से आयात होता है। पिछले 23 दिनों में इसकी कीमत 130 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर अब करीब 270 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। इसकी वजह से उत्पादन लागत दोगुना हो गई है।
रनियां और जैनपुर औद्योगिक क्षेत्र में संचालित फैक्टरियों में प्रतिदिन 20 से 30 करोड़ रुपये के डिटर्जेंट पाउडर और लिक्विड साबुन का उत्पादन हो रहा था। अब बदले हालात में कई इकाइयों में उत्पादन क्षमता का केवल 20 फीसदी ही काम हो पा रहा है। बीते एक सप्ताह से स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। कच्चे माल की कमी और बढ़ती लागत के चलते लघु एवं मध्यम उद्योगों पर सबसे अधिक असर पड़ा है। कई इकाइयों में उत्पादन ठप होने की कगार पर है। वहीं कुछ उद्यमी सीमित मजदूरों के साथ किसी तरह उत्पादन जारी रखे हैं। उद्यमियों ने सरकार से राहत पैकेज और कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की मांग की है।
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फोटो- 20 राकेश कुमार, उद्यमी
फोटो- 21 हिमांशु सिंह, उद्यमी।
महंगा हुआ कच्चा माल, लगातार घर रहा उत्पादन
एमएसएमएई से जुड़ी छोटी इकाइयों पर सीधा असर पड़ा है। कम पूंजी होने के बाद इतना बड़ा झटका लगा है। बड़ी इकाइयों के पास इतना स्टॉक रहता है कि उनकी सेहत पर प्रभाव नहीं पड़ता है। युद्ध से पहले 200 से 300 टन डिटर्जेंट बनाकर बाजार में बिक्री करते थे। अब वर्तमान में केवल 50 टन डिटर्जेंट बना रहे है। करीब 20 से 22 दिनों में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। - राकेश कुमार, उद्यमी
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अभी उद्योगों के हालात नहीं सुधरे हैं। खाड़ी देशों से आना वाला कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है। कई उद्यमी पहले के स्टॉक पर फैक्टरी चला रहे हैं। ऐसी स्थित रही तो उद्योगों में मारामारी बढ़ने की उम्मीद है। उद्यमियों के मुताबिक उद्यमियों ने आपस में बैठक करने के बाद यह निर्णय निकला है कि आर्डर के साथ नकद धनराशि मिलने पर ही माल तैयार किया जाएगा। - हिमांशु सिंह, उद्यमी