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मिले पुराने यार, चली शेर-ओ-शायरी की बयार

Sat, 10 Jan 2015 03:27 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
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35 साल बाद पुराने आईआईटियंस मिले तो मौज-मस्ती के साथ शेर और शायरी का दौर चला। गपशप हुई और क्लास, हॉस्टल में जाकर पुराने दिनों की यादें ताजा की।
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शुक्रवार को आईआईटी कैंपस में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला जब 1980 बैच के छात्र परिवार के साथ मिले।
आईआईटी के तीन दिवसीय एलमनाइ मीट (पूर्व छात्र सम्मेलन) का उद्घाटन शुक्रवार को निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना ने किया।

फिर परिचय का दौर शुरू हुआ। इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग से बीटेक करके सॉफ्टवेयर कंपनी के मालिक बनने वाले सुभाष कश्यप ने कहा कि अब कैंपस की शक्ल-सूरत बदल गई है।

बड़े और अच्छे भवन बन गए हैं। हरियाली भी अच्छी है। ऐसे में पुरानी यादों में जाने और फिर से पढ़ाई शुरू करने का मन कर रहा है। सुभाष की कंपनी का टर्न ओवर 10 करोड़ रुपये है।
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सम्मेलन में 40 पूर्व छात्रों ने हिस्सा लिया है। डीन ऑफ एलमनाइ प्रो. प्रभात मुंशी ने बताया कि शनिवार को पूर्व छात्र आम की बगिया में लंच करेंगे। शाम को डायरेक्टर के साथ डिनर होगा।

रविवार को बिठूर जाने का प्रोग्राम बना है। आईआईटी से बीटेक करने वाले रवींद्र प्रकाश दुबे ने बताया कि अभी दो हजार मेगावाट सोलर एनर्जी पैदा की जा रही है।

2022 तक भारत में 20 हजार मेगावाट सोलर एनर्जी पैदा की जा सकती है। इस पर तेजी से काम चल रहा है।

सिंगल विंडो सिस्टम हो

अमेरिका से आए प्रदीप डी पारिख ने कहा कि प्रवासी भारतीयों को आकर्षित करने के लिए देश में सिंगल विंडो सिस्टम लागू करना जरूरी है। जो प्रवासी भारतीय निवेश करें, उन्हें सारी सुविधाएं एक जगह मिलनी चाहिए।

निवेश करने के 300 दिनों बाद टैक्स वसूलने का इंतजाम होना चाहिए। प्रदीप ने प्रवासी भारतीयों को आजीवन वीजा दिए जाने पर खुशी जताई। कहा कि भारत सरकार अच्छे रास्ते पर है।

अगले पांच साल में देश की दशा, दिशा बदल सकती है।


12 भाषाओं में बनाया कंप्यूटर की-बोर्ड

आईआईटी से बीटेक और एमटेक करने वाले मोहन तांबे को इंडियन स्क्रीप्ट की-बोर्ड का जनक माना जाता है। शुक्रवार को आईआईटी कानपुर आए और कहा कि हिंदी, उर्दू, संस्कृत, कश्मीरी, तमिल सहित 12 भारतीय भाषाओं का कंप्यूटर यूनिकोड बना चुके हैं।

1984 में देव नागरी लिपि का पहला की-बोर्ड बनाया था, जिसका अपडेट वर्जन आज भी चल रहा है। तिब्बत, भूटान, श्रीलंका सहित तमाम विदेशी भाषाओं का की-बोर्ड भी बनाया है।
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आईआईटियन का कहना है कि हाई-फाई मोबाइल का चलन बढ़ गया है। अब ऐसी तकनीक की जरूरत है जो कि मोबाइल पर ही टीवी प्रोग्राम और फिल्म देखने की सुविधा उपलब्ध करा दे। इस पर रिसर्च किया जा रहा है।

काफी हद तक सफलता मिली है।    

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