कानपुर देहात। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण आने के बाद गांवों में माहौल बदलने लगा हैं। जहां उम्मीद से हटकर सीट आरक्षित हो गई है वहां नए चेहरों की तलाश शुरू हो गई है। पुराने मठाधीश अपने करीबी को मैदान में उतारने का दांव चलने की तैयारी में लग गए हैं। कुछ नए चेहरे खुद मैदान में उतरने के लिए व्याकुल हो गए हैं। खेती किसानी के काम से मौका निकालकर गांव की चौपाल में पंचायत की सरकार बनाने पर चर्चा हो रही है।
जिले में 618 ग्राम पंचायत व 32 जिला पंचायत सीटों के अलावा ग्राम पंचायत सदस्य व क्षेत्र पंचायत सदस्यों के लिए चुनाव होना है। आरक्षण आने के बाद अधिकांश गांवों मेें पुराने समीकरण बदल गए हैं। जिला पंचायत की कुल 32 सीटों में दस अनारक्षित हैं। बाकी में आरक्षण के चलते अभी तक सक्रिय दावेदारों की गणित बिगड़ गई है। ग्राम पंचायतों के आरक्षण से नए आंकड़े लगाने का काम शुरू हो गया है। जिले की कुछ ग्राम पंचायतों में पुराने लोगों का ही कब्जा रहता है। वहां सीट आरक्षित होने पर वह अपने बटाईदार, करीबी का चेहरा तलाश रहे हैं। ऐसी ग्राम पंचायतों में प्रत्याशी का चयन हो रहा है कि वह किसी भी हाल में पाला न बदले। पिछड़े व अनुसूचित जाति की सीटों पर कुछ शिक्षित युवा बिना किसी प्रस्ताव के मैदान में ताल ठोंकने के लिए तैयार हो चुके हैं।
गुरुवार को जिले के गांवों में आरक्षण पर चर्चा के साथ प्रत्याशी चयन को लेकर समर्थक अलग-अलग गुटों में गणित लगाते नजर आए। सरवनखेड़ा ब्लाक के सैंथा, मनेथू, सरवनखेड़ा, निनायां, भदेसा, आलापुर, गंगरौली, कोरारी गांवों में सामान्य वर्ग के दावेदार महीनों पहले से मतदाताओं के बीच पकड़ बनाने का प्रयास कर रहे थे। वह आर्थिक मदद के साथ उनके हर दुख में शामिल हो रहे थे लेकिन यहां आरक्षण ने उनकी गणित बिगाड़ दी। इन गांवों में नए दावेदारों ने ताल ठोकनें की तैयारी कर ली है। पहले से सक्रिय लोगों के सामने अपने प्रत्याशी के चयन की मजबूरी हो गई है।
...हम तो प्रधान बनते-बनते रह गए
रसूलाबाद। आरक्षण के बाद ग्राम पंचायतों के उन लोगों में मायूसी है जहां गांव का मुखिया बनने की तैयारी वह लंबे समय से कर रहे थे, लेकिन अब वह सीट आरक्षित होने के चलते चुनाव लड़ने से वंचित रह गए। ऐसे लोगों पर ग्रामीण तंज कस रहे हैं। पुराने दावेदारों को देखकर गांवों में कुछ मजाकिया लोग गाना गा रहे हैं दिल के अरमां आरक्षण में बह गए, हम तो प्रधान बनते-बनते रह गए। दावेदार बेहद मायूस हैं। कई गांवों में दावेदार इतना आश्वत थे कि वह चुनाव की तैयारी को लेकर मतदाताओं के बीच रुपये खर्च रहे थे। साथ ही दावतें भी चल रही थीं। अब वह ठगे महसूस कर रहे हैं। रसूलाबाद ब्लाक की ग्राम पंचायत जोत, कठारा, तिस्ती, पहाड़ीपुर, सिमरामऊ, मुलही, दया, नारखुर्द, अपौना, दशहरा सुजनपुर में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई है। पहाड़ीपुर को छोड़कर सभी ग्राम अन्य उक्त सभी ग्राम पंचायतों में सामान्य वर्ग के लोग ही प्रधान थे। फिर से जोरदार तैयारी किए थे। आरक्षण सूची देखने के बाद मायूस हो गए हैं।