कानपुर देहात। मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्सिंग पर की जा रही भर्ती सवालों के घेरे में है। कई अभ्यर्थियों को सांठगांठ कर भर्ती कर काम कराने के आरोप लग रहे हैं। इसकी जानकारी पर शुक्रवार को राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला हकीकत जांचने के लिए मेडिकल कॉलेज निरीक्षण करने पहुंचीं। यहां पर उन्हें आठ बाहरी व्यक्ति काम करते मिले। इस पर प्राचार्य ने तर्क दिया कि इन कर्मचारियों को उन्होंने अपने निजी वेतन से रखा है और काम लेते हैं। वहीं, मेडिकल कॉलेज में कई अव्यवस्थाएं भी मिलीं। इस पर राज्यमंत्री ने मुख्यमंत्री को रिपोर्ट भेजने की बात कही है।
महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला शुक्रवार दोपहर पौने 12 बजे के करीब मेडिकल कॉलेज पहुंचीं। यहां पर उन्होंने सबसे पहले डॉक्टरों व कर्मचारियों की उपस्थिति देखी। यहां पर उपस्थिति रजिस्टर दुरुस्त नहीं मिले। इस पर उन्होंने बॉयोमेट्रिक से रिकार्ड निकलवाया। जिसमें अधिकांश डॉक्टर व कर्मचारियों की एक से डेढ़ घंटा देरी से उपस्थिति दर्ज मिली। इनमें से डॉ. अनूप कुमार निगम, डॉ. अराधना अनुपस्थित मिलीं। जबकि बायोमेट्रिक में दर्ज 116 में 69 कर्मचारियों की उपस्थिति, एक अवकाश पर व 46 अनुपस्थित पाए गए।
वहीं, प्राचार्य के कार्यालय में आठ बाहरी व्यक्ति काम करते मिले। इस पर राज्यमंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई। राज्यमंत्री ने जब बाहरी लोगों के काम करने के बारे में प्राचार्य डॉ. सज्जन लाल वर्मा से जानकारी की तो उन्होंने बताया कि वह इन कर्मचारियों को अपने निजी वेतन से रख कर काम करा रहे हैं। जिन्हें 6000 रुपये प्रति माह देने की बात कही। इस पर मंत्री ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना है। किसी भी बाहरी व्यक्ति को सरकारी कार्यालय में रख कर काम नहीं कराया जा सकता। इस पर प्राचार्य व अन्य स्टॉफ चुप्पी साध गया। इसके बाद उन्होंने प्राचार्य से निजी तौर पर रखे गए कर्मचारियों के बारे में नाम व पद सहित लिखित में लिया। इसके अलावा मंंत्री को अस्पताल में कई अन्य खामियां भी मिलीं। इस पर उन्होंने पूरी रिपोर्ट बना कर कार्रवाई के लिए शासन भेजने की बात कही है।
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यह लोग करते मिले काम..
प्राचार्य ने लिखित में राज्यमंत्री को जो सूची दी। उसमें अनूप कुमार उनके निजी ड्राइवर, कुलदीप कुमार, अभिषेक टाइपिस्ट, गोविंद, नीरज रानी सफाई कर्मचारी, सत्येंद्र, जितेंद्र कुमार, शुभम चपरासी बताया गया है। इन सभी को छह-छह हजार रुपये देने की बात कही।
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वर्जन...
मेडिकल कॉलेज में चारो तरफ मनमानी हावी है। गलत ढंग से भर्ती की जा रही है। बाहरी लोगों से नियम विरुद्ध तरीके से काम कराया जा रहा है। डॉक्टर व कर्मचारी समय से नहीं पहुंचते हैं। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने निजी वेतन से आठ कर्मचारियों को रखने की बात कही है। यह मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना और अनुशासनहीनता है। निरीक्षण में अस्पताल के सीसीटीवी बंद पाए गए हैं। एसआर, जेआर ने दो माह से वेतन न मिलने की शिकायत की है। मरीजों ने भी हड़्डी के ऑपरेशन रुपये लेकर किए जाने की शिकायत की है। जो लोग अनुपस्थित मिले हैं, उनका वेतन काटने के निर्देश दिए गए हैं। पूरे मामले की निरीक्षण रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजी जाएगी। साथ ही मामले में जिलाधिकारी को भी अवगत कराया गया है। - प्रतिभा शुक्ला, राज्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार
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मरीज बोले, रुपये लेकर किया जाता ऑपरेशन
राज्यमंत्री ने ट्रामासेंटर का निरीक्षण किया। यहां पर उन्हें आईसीयू चलता नहीं मिला। इसी परिसर में हड्डी रोग से ग्रसित मरीज भी भर्ती थे। निरीक्षण के दौरान कई मरीजों ने बताया कि उनकी सुबह से ड्रेसिंग नहीं की गई है। एक मरीज ने बताया कि पैर फैक्चर होने पर वह यहां आए थे। उनसे एक डॉक्टर ने दो कर्मचारियों के माध्यम से ऑपरेशन करने की बात कही। जिसके लिए 12 हजार रुपये ले लिए। इतना सुनते ही मंत्री का पारा हाई हो गया। मंत्री ने मौजूद स्वास्थ्य अधिकारियों की जमकर क्लास ली। इसके बाद रुपये लेने वाले डॉक्टर को चिह्नित कर कार्रवाई के निर्देश दिए।
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घंटों देरी से मिली जांच, उठानी पड़ती परेशानी
जिला अस्पताल के पुराने पंजीकरण गेट के पास एक महिला फर्श पर लेटी मिली। जिसे देख मंत्री उसके पास जा पहुंची। उससे जब जमीन पर लेटे होने की जानकारी की तो पीड़ा बयां करने लगी। उसने अपना नाम रामवती निवासी भिखनापुर बताते हुए कहा कि वह कई दिन से बीमार है। शुक्रवार सुबह मेडिकल कॉलेज दिखाने के लिए आई थी। डॉक्टर ने जांच कराने के बाद दवा लिखने की बात कही। बीमार हालत में किसी तरह वह परिवार के लोगों के साथ जांच कराने के लिए प्रथम तल तक गई। जहां वह बैठ नहीं पा रही थी। जांच रिपोर्ट एक बजे के बाद मिलने की बात कही गई। इस पर वह परेशान होकर जमीन पर लेट गई। वहीं कई अन्य मरीजों ने बताया कि जांच में घंटाें इंतजार करना पड़ता है।