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जन्म देने वाले कर रहे ‘मौत के हवाले’

Thu, 08 Dec 2016 01:15 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो
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वैध रूप से प्रसव कराने और नवजात की हत्या का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। जुलाई से छह दिसंबर तक नौ नवजात मिले हैं। इनमें आठ की मौत हो गई। मरने वालों में तीन बेटियां थीं। लावारिस मिले चार नवजातों के अस्पताल में नाल काटते समय लगाई जाने वाली चिमटी लगी थी। लिहाजा, धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर और नर्स की भूमिका भी शक के घेरे में है। सभी मामलों में रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी गई लेकिन हर मामले को दबा दिया गया। 
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पांच दिसंबर को शहर कोतवाली के शेखर कालोनी में नाले के किनारे नवजात पड़ा मिला था। मार्निंग वाक के लिए निकले शिक्षक नेता योगेश त्यागी ने नवजात को देखा था। मोहल्ले की सरिता ने उसे नर्सिंग होम पहुंचाया। अस्पताल की सूचना पर कोतवाली पुलिस ने उसे चाइल्ड केयर संस्था को सौंप दिया था।

बाद में शिशु को लखनऊ भेज दिया गया। इसी तरह 23 नवंबर को शहर की नवीन सब्जी मंडी के पीछे तालाब के पास नवजात बालिका का शव मिला था। इस बच्ची की नाल में अस्पताल में लगाई जाने वाली चिमटी लगी थी। 17 अक्टूबर को शहर के सांडी रोड के पास और 28 अगस्त को शेखर कालोनी में गंदे नाले के किनारे भी नवजात के शव मिले थे।
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गंदे नाले किनारे मिले नवजात के शव की नाल में भी अस्पताल की चिमटी लगी थी। 28 जुलाई को मोहल्ला आवास विकास में दयाल गेस्ट हाउस वाली गली में नवजात का शव मिला था। शव को कुत्तों ने नोच डाला था। 
18 सितंबर को देहात कोतवाली के कोइलीपुरवा गांव के बाहर नवजात बच्ची का शव मिला था। मई में माधौगंज के सिरदार नगर के कब्रिस्तान के बाहर नवजात बच्ची मिली थी। इस बच्ची की नाल में भी अस्पताल की चिमटी लगी थी। डॉक्टराें की लापरवाही से बच्ची ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया था। 

22 अक्टूबर को माधौगंज सीएचसी के पीछे तालाब में नवजात का शव मिला था।  20 नवंबर को संडीला में नवजात का शव पड़ा मिला। इन मामलों में पुलिस ने खुद रिपोर्ट दर्ज कराई लेकिन ये जानने की कोशिश नहीं की गई कि नवजात की हत्या के पीछे किसका हाथ है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं। 

फाइलों में दफन कर दी बच्ची की मौत
हरदोई। 22 अक्टूबर को माधौगंज थाना क्षेत्र के सिरदार नगर गांव के कब्रिस्तान के बाहर मिली नवजात बच्ची को आशा बहू और गांव के दंपति सीएचसी माधौगंज ले गए। जहां से उसे जिला महिला अस्पताल भेज दिया गया, महिला अस्पताल ने उसे पुरुष अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के चक्कर लगाने में नवजात की जान चली गई। इस मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिस पर डीएम और डायरेक्टर स्वास्थ्य ने जांच कराई। कई डॉक्टरों की भूमिका निशाने पर आई लेकिन अधिकारियों ने नवजात की मौत को फाइलों में दफन कर दिया। 
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