आज हर जगह ईद का जश्न मनाया जा रहा है। मस्जिदों में नमाज अदा करने के बाद लोगोंं ने एक दूसरे को गले मिलकर ढेर सारी बधाईयां दीं। कानपुर के अलावा आसपास के जिलों इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, उन्नाव, हरदोई, बांदा, चित्रकूट हमीरपुर, महोबा में हर्षोल्लास के साथ ईद का त्योहार मनाया गया।
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ईद की नमाज अदा करते लोग
ईद रमजान का महीना खत्म होने पर मनाई जाती है। ईद से पहले एक महीने तक मुस्लिम समुदाय के लोग रोजे रखते हैं। इसके बाद नया चांद दिखने पर ईद मनाई जाती है। कानपुर देहात के झींझकमें ईद के मौके पर गले मिलते हुए लोगों ने एक दूसरे को मिठाईयां खिलाईं।
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ईद की नमाज अदा करते लोग
एक साल में दो ईद मनाई जाती हैं। पहली ईद को ईद-उल-फितर कहा जाता है तो वहीं दूसरी को ईद-उल-अजहा (बकरीद) कहा जाता है। बकरीद पर मुस्लिम समुदाय के लोग जानवर की कुर्बानी देते हैं। कुर्बानी का गोश्त बांटा जाता है। इसके अलावा इस दिन भी गरीबों को दान दिया जाता है।
मुस्लिम समुदाय के लोग ईद-उल-फितर से पहले पूरे एक महीने रोजे रखते हैं, इस दौरान ये लोग कुछ भी नहीं खाते-पीते। सुबह सहरी से पहले जो खाना होता है वह खा लेते हैं और उसके बाद फिर शाम को इफ्तार के बाद खाया जाता है। इसके साथ ही कहा गया है कि रमजान के दौरान नेकी के काम ज्यादा से ज्यादा करने होते हैं। कहा गया है कि इस दौरान कोई भी अच्छा काम करता है तो उसका 70 गुना सबाब(पुण्य) मिलता है।