मौत का साया बनकर आए भैंसे को अजय पाल रोज देसी अंडे खिलाता था। उस भैंसे ने दोनों की सांसें छीनकर हमेशा-हमेशा के लिए गहरी नींद में सुला दिया। जानें डाक्टरों की राय...
ग्रामीणों ने बताया कि अजय पाल प्रजनन प्रक्रिया में सक्रिय रखने के लिए रोजाना देसी मुर्गी के कई अड्डे अपने पालतू भैंसे को खिलाता था। साथ ही हरा चारा, भूसा के संग तेल और गुड़ भी खिलाया जाता था। शनिवार को भैंसे को चारा वाली हौदी से दूर बांधने और उसके सामने ही चारा तैयार करने पर भैंसा आक्रामक हो गया। जब मालकिन अनारकली उसे खोलकर चारा वाली हौदी पर ले जाने लगी, तभी भैंसे ने हमलाकर मार डाला।
भूख में बेकाबू हो जाते हैं पशु
शिवराजपुर के राजकीय पशु चिकित्सालय में तैनात डा. आरडी राम ने बताया कि ग्रामीण भैंसों के प्रजनन के लिए अच्छी नस्लों के भैंसे पालते हैं। लोग उत्तेजना बनाए रखने वालीं खाद्य वस्तुएं उन्हें खिलाते हैं साथ ही पशु बहुत ज्यादा भूखे होने पर गुस्सा जाते हैं और हमलावर हो जाते हैं। हरनू गांव में हुई घटना का कारण इन्हीं दो बातों में से एक है। डाक्टर के अनुसार नवंबर माह पशुओं में गर्भाधान का उपयुक्त समय है, जितनी सर्दी होनी चाहिए उतनी है नहीं, जबकि भैंसे को लगातार उत्तेजक चीजें खिलाई जा रही होंगी इसलिए वह और बेकाबू हो गया।
कानपुर चिड़ियाघर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके सिंह ने बताया कि भैंसे के आक्रामक होने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। प्रमुख वजहें ये हैं।
- भैंसे को बिच्छू, सांप जैसे किसी जहरीले जीव द्वारा काट लेना
- कुत्ते के काटने की वजह से काफी बाद रेबीज हो जाना
- भैंसे को हष्ट पुष्ट रखने के लिए गर्म दवाओं के रिएक्शन से
- किसी आवाज से अचानक बिदक जाने पर क्रोध आ जाना
- मादा के साथ मिलन के दौरान अवरोध पैदा करने से बिदकना