बैंगन का पौधा बना पेड़, लंबाई आठ फीट सात इंच
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हरे रंग के हरित बुंदेला बैंगन को कुदरत ने लंबाई का तोहफा दिया है। शाक-भाजी केंद्र में इस बैंगन को दो बीजों से क्रॉस कराकर सिर्फ इसलिए तैयार किया गया था कि यह बारहों मास फलेगा और हरा रंग होने से बादीपन कम हो जाएगा। लेकिन, इसे तीसरा गुण अपने-आप मिल गया।
यह पौधा पेड़ बन गया और इसकी लंबाई आठ फीट सात इंच हो गई। इतनी लंबाई से हरित बुंदेला को विकसित करने वाले केंद्र के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. एसपी सचान खुद हैरत में हैं। उनका कहना है कि म्यूटेशन के कारण यह तीसरा गुण पैदा हो गया।
इतनी लंबाई के संबंध में सोचा नहीं था। विज्ञानी डॉ. एसपी सचान ने हरित बुंदेला बैंगन को किचन गार्डेन के मकसद से तैयार किया। शहरी क्षेत्रों के लिए यह बहुत मुफीद है। गृह वाटिका में एक पौधा लगाने पर एक परिवार को साल भर बिना बादीपन वाले बैंगन मिल सकते हैं।
इसके रख-रखाव के लिए भी कुछ नहीं करना। सिर्फ लगाने के वक्त चार किलो गोबर की खाद डालनी पड़ती है। एक पौधा पांच-छह साल जीवित रहता है और लगातार फल देता है। डॉ. सचान का कहना है कि 20 दिन के पौधे से लगभग 54 फल तोड़ने लायक हो जाते हैं। बैंगनी रंग से बैंगन में बादीपन आता है। यह बायोटिक होता है।
ऐसे किया विकसित
बुंदेलखंड के देसी बैंगन और इंडियन इंस्टीट्यूट आफ एग्रीकल्चरल साइंसेस दिल्ली के पूसा बैंगन के बीज को क्रॉस कराया गया। बुंदेलखंड के बैगन की खासियत है कि यह हरे रंग का होता है, पूरे साल फल देता है, लंबाई चार इंच होती है।
पूसा की खासियत यह कि यह लंबा होता है। दोनों के जीन मिलने से हरित बुंदेला लौकी की तरह हरा और लंबा हो गया। इस प्रक्रिया में इसे अपने-आप म्युटेशन के जरिये लंबा होने का गुण मिल गया। माना जा रहा है कि कालसीसीन म्यूटेजेनिक एजेंट का यह असर है।
कुछ तथ्य
- इसमें कीड़े और बीमारी नहीं लगती।
- फलों की लंबाई 35 से 40 सेमी होती है।
- सिर्फ जैविक खाद देकर गृह वाटिका में लगाया जा सकता है।
- बैंगनी रंग न होने से बादीपन भी नहीं, रोगी भी खा सकते हैं।