कारोबार के लिए अब कंपनी गठित करने की प्रक्रिया को आसान कर दिया गया है। ताजा संशोधन के बाद रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज को सिर्फ एक बार में ही वो तमाम जानकारियां उपलब्ध करा दी जाएंगी, जिन्हें अब तक चरणबद्ध प्रक्रिया में पूरा किया जाता था। इसके अलावा सिंगल डायरेक्टरशिप के साथ ही लिमिटेड और प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए सूचनाएं देने के अलग-अलग फॉर्म को समाप्त करके एक फॉर्म बनाया गया है। एक मई को कंपनी मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक न्यू इंटीग्रेटेड प्रॉसेस पेश किया गया है।
इसमें पूर्व की व्यवस्था में तमाम संशोधन किए गए हैं। सबसे मुख्य व्यवस्था कंपनी के फॉर्मेशन यानी गठन को लेकर की गई है। अभी तक कंपनी बनाने के लिए सबसे पहले डायरेक्टर्स आईडेंटिफिकेशन नंबर के लिए आवेदन करना होता है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी के नाम रखने संबंधी आवेदन किया जाता था।
आवेदक द्वारा प्रस्तावित नाम से यदि कोई कंपनी चल रही है तो उसे दोबारा चार प्रेफरेंस देने के लिए कहा जाता है। किसी तरह यह प्रक्रिया पूरी होती है तो कंपनी के संभावित निदेशकों का ब्यौरा दिया जाता है। फिर सबके डिजिटल सिग्नेचर एप्रूव कराने की कार्रवाई कराई जाती है।
इसके अलावा कंपनी का मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग दाखिल किया जाता था। इसमें गलतियां होने की दशा में उसे दुरुस्त कराते थे। इस तरह एक लंबी प्रक्रिया कंपनी के गठन के पूर्व होती है। यही नहीं इस चरणबद्ध प्रक्रिया के साथ ही विभिन्न प्रकार की फीस भी देनी होती है। पर ताजा संशोधन के बाद कंपनी बनाने की प्रक्रिया आसान हो गई है।
इसमें एक आईएनसी-29 फॉर्म पेश किया गया है। इसमें डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर (डिन) के आवेदन के साथ, कंपनी केे नाम से जुड़ा आवेदन, डायरेक्टरों से जुड़ी सूचनाएं और कंपनी का बायलॉज एक साथ ही करना दाखिल होगा। ये सूचनाएं विभिन्न प्रकार की कंपनियों के लिए एक ही प्रकार के फॉर्म में दी जाएंगी।
नई प्रक्रिया के तहत दो हजार रुपये की एक एडिशनल फीस लगाई गई है, जो अभी तक नहीं ली जाती थी। वहीं शेयर कैपिटल की फीस अलग से ली जाएगी।
नई प्रक्रिया से कंपनी का गठन करना बेहद आसान हो गया है। अब एक बार में ही तमाम औपचारिकताएं पूरी हो जाएंगी, जिससे काफी सहूलियत होगी। मंत्रालय के इस कदम का स्वागत है।
- सीए पद्मेश बाजपेई, कंपनी सलाहकार