पुखरायां। गर्मी व उमस का प्रकोप बढ़ने के साथ ही बाजारों में मटकों की बिक्री में उछाल आ गया। बढ़ते तापमान के बीच लोग अब फ्रिज का ठंडा पानी पीने के बजाए मटके का पानी पीना अधिक पसंद कर रहे हैं।
स्वास्थ्य के लिहाज से भी मटके का पानी फायदेमंद माना जाता है। पुखरायां नगर सहित अन्य कस्बा व गांवों में मिट्टी से निर्मित मटका, सुराही सहित पानी भरने के बर्तनों की बिक्री बढ़ गई है। पुखरायां में मटका विक्रेता मुन्नी देवी व संजय ने बताया कि अप्रैल में गर्मी ने अपना असर दिखाया है। इस कारण मटकों की बिक्री भी बढ़ गई है। पिछले साल के मुकाबले इस बार अधिक बिक्री हो रही है।
जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है वैसे-वैसे मटकों, सुराही, मटकी की बिक्री भी बढ़ रही है। लोकल में मटके बनाए जाने के साथ झांसी से बलुई मिट्टी के बने मटके अधिक आ रहे हैं। जिनमें पानी अधिक ठंडा होता है। अब मटकों में टोटी लगी आती है। इससे बार-बार किसी बर्तन ने डुबो कर पानी निकालने का झंझट नहीं रहता है। मटका रखने के लिए स्टैंड भी मिलता है। इससे बाजार में विविधता बढ़ी है। अब अधिकतर लोग सफाई और शुद्धता का ध्यान रख रहे हैं।
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100 से 600 रुपये तक कीमत के मटके-सुराही
विक्रेताओं ने बताया कि मटकों की कीमत उनके साइज और डिजाइन के अनुसार तय की गई है। साधारण छोटे मटके 100 से 200 रुपये तक मिल रहे हैं। जबकि डिजाइनर टोटी वाले मटके व सुराही 300 से 600 रुपये तक बिक रहे हैं। जिनके घरों में फ्रिज हैं वह भी घर के सभी सदस्यों को पानी पीने के लिए मटका ही खरीद रहे हैं। जिनका उपयोग करने में आसानी होती है।
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मटके में रखे पानी में घुल जाते हैं सूक्ष्म खनिज : डॉ. पवन
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय गदाईखेड़ा के चिकित्सक डॉ. पवन सिंह ने बताया कि मटके का पानी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। प्राकृतिक मिट्टी से बने मटके में रखे पानी में सूक्ष्म खनिज (सूक्ष्म खनिज) घुल जाते हैं। यह शरीर को प्राकृतिक रूप से पोषण देते हैं। मटके का पानी न केवल पाचन शक्ति को मजबूत करता है बल्कि शरीर के तापमान को संतुलित रखने में भी सहायक होता है। इसके पानी का सेवन करने से मानसिक शांति मिलती है साथ ही मुंह सूखने वाली शिकायत नहीं रहती है। मिट्टी में पाए जाने वाले प्राकृतिक खनिज तत्व शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते बल्कि इसे संतुलित और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं।