हादसे से हर किसी की रूह कांप गई। बस की रफ्तार बहुत ही तेज थी। 200 मीटर तक हादसे ने तबाही मचा दी। ई-बस ने दो कारों, दो बाइकों, दो स्कूटी, एक टेंपो के परखचे उड़ा दिए। फिर डंपर से टकरा गई। सड़क पर शव बिखरे थे और घायल तड़प रहे थे। हर तरफ चीख-पुकार और चीत्कार मच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घंटाघर चौराहे से ही ये बस बहुत ही रफ्तार में निकली थी। वहां से चंद मीटर दूर पहुंचते ही वाहनों को टक्कर मारते ही लोगों को रौंद दिया। पुलिस व राहगीरों ने मिलकर किसी तरह से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। शवों को भी एंबुलेंस व निजी वाहनों से भिजवाया। हादसे के बाद पूरे रूट पर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई। करीब 200 मीटर तक के हालात बयां कर रहे थे कि हादसा कितना बड़ा है। मृतकों व घायलों की चप्पलें, फटे कपड़े, गाड़ियों के घिसटने के निशान आदि। जिसने भी हादसा देखा वह सकते में पड़ गया।
डिवाडर पर चढ़ी कार उतार रहे थे, बस की चपेट में आ गए
हादसे से चंद मिनट पहले सुमित तिवारी नाम के शख्स की एक स्विफ्ट डिजायर कार घंटाघर पुल उतरते ही डिवाइडर पर चढ़ गई थी। वहां मौजूद लोग उस कार को डिवाइडर से हटाने का प्रयास कर रहे थे। तभी बेकाबू बस वहां आ धमकी और कार हटाने में जुटे कई लोगों को चपेट में लेकर रौंदते हुए चली गई। ये कार भी बस में फंस गई और घिसटती हुई चौराहे तक चली गई।
डंपर और बस के बीच में फंस था एक
एक शख्स डंपर और बस के बीच में फंस गया। एक स्कूटी के टुकड़े-टुकड़े हो गए। पुलिस बड़ी मशक्कत से शव को निकाल सकी। अभी शव की पहचान नहीं हो सकी। इसी तरह से कई और वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए। ट्रैफिक पुलिस क्रेन आदि की मदद से रात दो बजे तक इन वाहनों को सड़क से हटवा सकी। तब जाकर यातायात शुरू हो सका।
दहशत फैली, पैदल जाने लगे लोग
हादसे के बाद सैकड़ों लोगों की भीड़ जुट गई। हादसे की दहशत की वजह से लोग ई-रिक्शा या अन्य किसी साधन के बजाय पैदल ही स्टेशन तक जाने लगे। कुछ लोगों की ट्रेन भी छूट गई। हालांकि जब क्षतिग्रस्त वाहन हटवाकर पुलिस ने रूट साफ कराया। तब लोग वाहन से जाने लगे।