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यूपीः एनआरसी-सीएए की वजह से बंटवारे के समय पाक से आए बुजुर्ग भी लगा रहे जन्म प्रमाणपत्र के लिए चक्कर

Sat, 28 Dec 2019 06:46 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
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नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : पीटीआई
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एनआरसी (भारतीय नागरिक रजिस्टर) और सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) से शहर के उम्रदराज लोगों में हलचल है। कानून बनते ही नगर निगम मुख्यालय और जोनल कार्यालयों में जन्म प्रमाणपत्र बनवाने वालों की भीड़ बढ़ गई है।
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प्रमाणपत्र बनवाने के लिए पहुंच रहे लोग इस कानून के बारे में ज्यादा जानकारी होने से तो इनकार कर रहे, लेकिन उन्हें लगता है कि जन्म प्रमाणपत्र बनवा लेने से वे इस कानून के तहत भारतीय नागरिकता के दायरे में आ जाएंगे। शुक्रवार को जन्म प्रमाणपत्र के लिए पहुंचे लोगों में बटवारे के समय पाकिस्तान से आए बुजुर्ग भी शामिल रहे। ऐसे लोग भी आ रहे हैं, जिनके पास प्रमाणपत्र के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं हैं।

 

जन्म मृत्यु पंजीकरण अधिकारी ऐसे लोगों का एसएसपी और सीएमओ से सत्यापन करा रहे हैं। लगभग 50 लाख आबादी वाले शहर में करीब दो लाख रिफ्यूजी हैं, जो देश के बंटवारे के दौरान पाकिस्तान से यहां आकर बस गए। एक विशेष वर्ग के भी तमाम लोग ऐसे हैं, जिनका न तो यहां पुश्तैनी रिकार्ड है और न ही उनका हाईस्कूल का अंकपत्र, अचल संपत्ति संबंधी दस्तावेज, मकान या खेत या दुकान आदि का मालिकाना हक संबंधी कागज हैं।

6-7 दशक से देश में रह रहे इन लोगों के पास जन्म प्रमाणपत्र भी नहीं हैं। एनआरसी और सीसीए आने से ऐसे लोगों की चिंता बढ़ गई है। नगर निगम ने भी जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए बुजुर्गों का पुलिस सत्यापन भी शुरू करा दिया है। इसके लिए आवेदन होते ही निर्धारित प्रारूप में उसकी एक प्रति एसएसपी के  माध्यम से संबंधित थाने में भेजी जा रही है।

 

प्रारूप में सबसे ऊपर लिखा है कि इसे थाना प्रभारी या थानाध्यक्ष स्वयं भरेंगे और नाम, पदनाम, तारीख सहित संस्तुति के संबंध में स्पष्ट आख्या टिप्पणी सहित करेंगे। एक महीने में अभी तक तीन आवेदनों में ही पुलिस की रिपोर्ट लगकर आ पाई है।

पुलिस सत्यापन के लिए भेजे जा रहे प्रारूप के कॉलम
आवेदक का नाम व उपनाम, स्थायी व अस्थायी पता, पिता/माता/पत्नी की राष्ट्रीयता, मूल निवास, यदि पाकिस्तान के निवासी हों तो वहां का पूरा पता एवं पाकिस्तान छोड़कर आने की तारीख, हाईस्कूल की अंक तालिका, शैक्षिक योग्यता व उन स्थानों का उल्लेख जहां 15 वर्ष के बाद शिक्षा पाई हो, कार्यालय व फर्म का पूरा पता जहां अभ्यर्थी काम करता है।

 
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आवेदक को जानने वाले दो स्थानीय उत्तरदायी व्यक्तियों के नाम, यदि आवेदक किसी न्यायालय से किसी अपराध में दोषी ठहराया गया हो तो उसका पूरा विवरण, एफआईआर या एनसीआर या पुलिस अभिलेखों में कोई आपराधिक इतिहास हो तो उसका पूरा विवरण, जांचकर्ता की चरित्र सत्यापन के संबंध में स्पष्ट टिप्पणी, थानाप्रभारी या थानाध्यक्ष की संस्तुति के संबंध में टिप्पणी।

उम्र के लिए सीएमओ का प्रमाण
जिन आवेदकों के पास उम्र सत्यापित करने के लिए हाईस्कूल का अंकपत्र नहीं है, उन्हें उम्र के सत्यापन के लिए सीएमओ कार्यालय भेजा जा रहा है।
 

एनआरसी, सीएए बनने के बाद से रोज 20-25 बुजुर्ग जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदक करने आ रहे हैं।  50 वर्ष, 70 वर्ष, 80 वर्ष तक के बुजुर्ग भी जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आ रहे हैं। कई के बच्चे जानकारी करने आ रहे हैं। जिनके पास निवास संबंधी प्रमाणपत्र नहीं है, वेे मोहल्ले के लोगों से निवास का सत्यापन करा सकते हैं। उम्र सीएमओ से प्रमाणित करा रहे हैं। पुलिस सत्यापन कराने के बाद नगर निगम भी जांच करा रहा है। जो आवेदन के साथ कागजी कार्यवाही पूरी करेंगे, उनके प्रमाणपत्र बनाए जाएंगे।
डॉ. प्रमिला निरंजन शुक्ला, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी

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