कानपुर में दवा कारोबार से जुड़े शख्स के 11वीं कक्षा में पढ़ने वाले बेटे ने फंदा लगा लिया। उसने नोट में लिखा कि सपने में चार चेहरे दिखते हैं, वो कहते हैं खुद जान दे दो... या मां-बाप और बहन को मार दो। पुलिस जांच में जुटी है।
कानपुर में दवा कारोबारी आलोक मिश्रा के 16 वर्षीय बेटे ने सोमवार को घर में फंदा लगाकर जान दे दी। यह द जैन इंटरनेशनल स्कूल में 11वीं का छात्र था। फॉरेंसिक टीम को छात्र की जेब में कागज मिला था, जिसमें नोट फॉर मोबाइल लिखा हुआ था।
विज्ञापन
पुलिस ने मोबाइल के नोटपैड को खोला तो उसमें अंग्रेजी में चार चेहरे दिखने वाली बात लिखी हुई मिली। लिखा है कि चेहरे कहते हैं कि खुद जान दे दो या मां-बाप और बहन को मार दो। परिजनों के अनुसार, जम्मू कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा रिश्ते में आलोक मिश्रा के मामा लगते हैं।
कोहना थाना इलाके के रानीघाट के पुराना कानपुर में आलोक मिश्रा रहते हैं। उनका इकलौता बेटा स्टेट लेवल का स्विमिंग खिलाड़ी था। 10वीं में 97 प्रतिशत अंक थे। दीपावली पर लड़के ने बड़ी बहन मान्या को सुसाइड नोट में लिखी बातें बताई थी।
विज्ञापन
माता-पिता छठ पूजा के लिए गए थे भागलपुर
कहा था कि इससे वह तनाव में है। घर में छठ पूजा की तैयारी होने से बहन ने घरवालों से इसका जिक्र नहीं किया। इस बीच माता-पिता छठ पूजा के लिए भागलपुर चले गए। सोमवार की शाम मान्या कोचिंग गई थी। घर में लड़का और उसकी दादी नीलम थे। शाम करीब 4:30 बजे दादी ने नाती को आवाज दी लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
दरवाजा अंदर से बंद था। कई बार आवाज देने के बाद भी कोई जवाब न आने पर पड़ोसी परमिंदर चंद्रा को बुलाया। क्षेत्रीय लोगों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया तो लड़के का शव पंखे के कुंडे में रस्सी से लटकता देखकर दादी गश खाकर गिर गईं।
नोट फॉर मोबाइल लिखा कागज मिला
पुलिस ने मोबाइल को कब्जे में ले लिया है। फॉरेंसिक टीम को छात्र की जेब में कागज मिला था जिसमें नोट फॉर मोबाइल लिखा हुआ था। पुलिस ने मोबाइल के नोटपैड को खोला तो उसमें अंग्रेजी में चार चेहरे दिखने वाली बात लिखी हुई मिली।
'खुद जान दे दो या मां-बाप और बहन को मार दो'
लिखा है कि चेहरे कहते हैं कि खुद जान दे दो या मां-बाप और बहन को मार दो। जांच में पता चला है कि लड़के ने अपनी बीमारी के बारे में 60-65 बार गूगल में सर्च किया। पता चला है कि छात्र सीजोफ्रेनिया बीमारी से एक साल से परेशान था। इसके लिए परिजनों को बिना बताए वह लक्षण के अनुसार, गूगल में बीमारी सर्च कर जानकारी जुटाता रहा।
कोहना थाना प्रभारी विनय तिवारी ने बताया कि परिजनों ने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है। छात्र सीजोफ्रेनिया बीमारी से एक साल से परेशान था। परिजनों को बिना बताए वह लक्षण के अनुसार, गूगल में बीमारी सर्च कर जानकारी जुटाता रहा।
सीजोफ्रेनिया में आती हैं आदेशात्मक आवाजें
सीजोफ्रेनिया में जान देने और दूसरों की जान लेने जैसी आदेशात्मक आवाजें सुनाई पड़ती हैं। मतिभ्रम होने पर वह उन चीजों को देखने की बात करता है जो हैं ही नहीं। ऐसे में रोगी आत्महत्या सरीखा कदम भी उठा सकता है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय चौधरी ने बताया कि मस्तिष्क के न्यूरो केमिकल असंतुलन होने से यह दिक्कत होती है। डॉ. चौधरी ने बताया कि सीजोफ्रेनिया में मुख्य रूप से रोगी के मस्तिष्क में डोपामीन न्यूरो केमिकल का संतुलन बिगड़ता है।
इससे अन्य न्यूरो केमिकल भी प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे रोगियों के शुरुआती लक्षणों के संबंध में व्यक्ति चुप हो जाता है, दूसरों से कटा रहता है, काम करने में उसका दिल नहीं लगता। इसके साथ ही बुदुबुदाते रहना भी एक लक्षण है।
घरवालों को यह लक्षण देखकर सतर्क हो जाना चाहिए। उसे तुरंत किसी मनोचिकित्सक के पास ले जाएं। मतिभ्रम, भ्रम और अव्यवस्थित बातचीत और व्यवहार इस रोग के खास लक्षण हैं।