हादसों में घायल लोगों की जान बचाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को बाइक या साइकिल से भी भेजना चाहिए। इससे घायलों को प्राथमिक उपचार जल्दी मिल जाएगा। चौपहिया एंबुलेंस के पहुंचने से पहले ही उपचार शुरू हो जाएगा। कई बार एंबुलेंस जाम में फंस जाती हैं। देरी की वजह से घायल की जान चली जाती है।
यह कहना है अमेरिका के न्यूयॉर्क कालेज आफ मेडिसिन के क्लीनिकल प्रोफेसर डॉ. कृष्ण कुमार का। उन्होंने कहा कि सात मिनट के अंदर घायलों को अस्पताल तक पहुंचने की व्यवस्था होनी चाहिए। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के पूर्व छात्र और स्वरूपनगर निवासी डॉ. कृष्ण कुमार अमेरिका की फायर पुलिस ईएमएस एकेडमी के पूर्व निदेशक भी हैं।
मेडिकल कॉलेज के एलटी-3 में उन्होंने घायलों के प्रबंधन के डाक्टरों को गुर सिखाए। उन्होंने बताया कि मस्तिष्क में ब्लड सरकुलेशन अगर पांच मिनट तक रुक गया, तो घायल का ब्रेन डेड हो जाता है। साथ ही रोगी के मुंह में ब्लड, थूक आदि भरने से सांस घुट जाती है। सांस का रास्ता पहले साफ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर साइकिल या बाइक से स्वास्थ्य कर्मी तुरंत मौके पर पहुंच कर घायल को प्राथमिक उपचार उपलब्ध करा दें, तो जान जाने का खतरा कम हो जाएगा।
घायल को हमेशा करवट से लिटाना चाहिए। जहां चोट लगी हो, उस जगह को रुमाल से 20 मिनट तक दबाए रखना चाहिए। इस मौके पर प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी, डॉ. आरके मौर्या, डॉ. एमपी मिश्रा, डॉ. धनंजय चौधरी, डॉ. मनीष सिंह, डॉ. गणेश शंकर, डॉ. जेएस कुशवाहा, डॉ. संजय कुमार आदि मौजूद रहे।
डॉ. कृष्ण कुमार विजिटिंग प्रोफेसर बने
डॉ. कृष्ण कुमार को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज का विजिटिंग प्रोफेसर बनाया गया। शनिवार को मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी ने उन्हें विजिटिंग प्रोफेसर का नियुक्ति पत्र दिया। वह कालेज की फैकल्टी को बालरोग एवं इमरजेंसी मेडिसिन के संबंध में पढ़ाएंगे। उनका कार्यकाल 11 जनवरी वर्ष 2021 तक रहेगा।