कानपुर हैलट इमरजेंसी से 17 नवंबर की रात को भगाया गया मरीज गेट के बाहर तड़पता रहा। स्ट्रेचर तक न मिलने से उसके बेटे कंधे का सहारा देकर ओपीडी तक ले गए। 12 घंटे बाद ईएमओ ने इस मरीज को भर्ती कराया।
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फर्रूखाबाद निवासी सीताराम (65) को उसके बेटे 17 नवंबर को रात करीब 9:30 बजे हैलट इमरजेंसी के सर्जरी विभाग में ले गए। दाहिने पैर में गहरे जख्म की वजह से चल पाना तो दूर वह खड़ा भी नहीं हो पा रहा था। सीताराम का आरोप है कि जूनियर डॉक्टरों ने पर्चा बनवाकर देर रात उसे पट्टी बांधीं, पर ठीक से इलाज करने के बजाय रात करीब 3 बजे उसे भगा दिया। बेटों ने भर्ती करने का आग्रह किया, पर भर्ती नहीं किया।
आरोप लगाया कि जूनियर डॉक्टर ने यह कहते हुए इमरजेंसी से बाहर जाने को कहा कि जिस डॉक्टर को उसका इलाज करना है वे मंगलवार को आएंगे, उसी दिन आना। मरीज रातभर इमरजेंसी के बाहर पड़ा रहा। रविवार को भी उसके बेटों ने डॉक्टरों से भर्ती करने के लिए गुहार लगाई, पर अनसुना कर दिया। उधर, ईएमओ डॉ. सुबोध ने बताया कि शाम 4 बजे उन्होंने इस मरीज को भर्ती कराया।