पुलिस के कहने पर हैलट के बाल रोग अस्पताल में भर्ती किए गए डेढ़ माह के मासूम के पिता से मंगलवार को एक जूनियर डॉक्टर ने इसलिए मारपीट कर दी कि उसके बच्चे को पुलिस ने भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने उसे कई थप्पड़ जड़ दिए और भद्दी गालियां दीं। आहत होकर पीड़ित ने बच्चे को लेकर रोते हुए अस्पताल छोड़ दिया। मामले की सूचना पर स्वरूपनगर इंस्पेक्टर ने फिर से बच्चे को हैलट में भर्ती कराया।
बिधनू के कैंधा गांव में रहने वाले मजदूर दयाशंकर अपने डेढ़ माह के बच्चे को लेकर मंगलवार को हैलट अस्पताल आए थे। बच्चे की आंत फट गई थीं और उसका पेट फूल गया था। हैलट में उसको डॉक्टर और दवाई न होने का हवाला देकर 4 घंटे तक एडमिट नहीं किया गया। दयाशंकर अपनी पत्नी यशोदा के साथ हैलट गेट पर बैठकर रोता रहा। देर रात एसएसपी ने इंस्पेक्टर स्वरूपनगर को हैलट भेजकर बच्चे को बालरोग में एडमिट कराया था।
बच्चे को डॉ. रूपा डालमिया के अंडर में भर्ती किया गया था। बुधवार को दयाशंकर को जूनियर डॉक्टर डॉ. साकेत ने कई तमाचे जड़ दिए और भद्दी गालियां भी दीं। दयाशंकर ने बताया कि शाम को बच्चे का अल्ट्रासाउंड कराने जाना था। उन्होंने बच्चे की विगो हटाने के लिए जेआर से कहा तो डॉ. साकेत ने कहा कि तुम्हें सिर्फ पुलिस बुलानी आती है बस पता नहीं कहां से चले आते हैं इसके बाद भद्दी गालियां दीं और कई तमाचे जड़ दिए।
‘साहब मेरा बेटा मर जाने दो
घटना से आहत होकर पिता दयाशंकर और उसकी पत्नी यशोदा फूट-फूट कर रोने लगे और बच्चे को लेकर अस्पताल छोड़ दिया। जैसे ही वह गेट पर पहुंचा था तो सूचना पाकर स्वरूपनगर इंस्पेक्टर संजय सिंह हैलट पहुंच गए और बच्चे को फिर से अस्पताल में भर्ती कराने लगे। दयाशंकर ने इंस्पेक्टर के पैर पकड़ कर कहा कि ‘साहब मेरा बेटा मर जाने दो, पर अब यहां नहीं रुकूंगा। गरीब हूं इसीलिए यहां आया था अगर रुपये होते तो मैं भी किसी प्राईवेट अस्पताल में भर्ती कराता।
मासूम का किया गया आपरेशन
मामले के बाद हरकत में आए सीनियर डॉक्टरों ने बच्चे की तुरंत देखभाल शुरू कर दी। पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. राकेश त्रिपाठी ने बच्चे का आपरेशन भी शुरू कर दिया। देर रात तक आपरेशन चलता रहा।