कानपुर। उर्सला में भर्ती बिसातखाना विस्फोट में झुलसे रोगियों ने डॉक्टरों पर जबरदस्ती छुट्टी लेने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। रोगियों का कहना है कि अभी उनकी स्थिति सही नहीं है। किसी को पूरे शरीर में दर्द है तो किसी के चेहरे और हाथों में जलन है। तीन दिन बीत जाने के बावजूद इमरजेंसी में सामान्य रोगियों के बीच हो रहा है जिससे सबको संक्रमण का खतरा है।
झुलसे जुबिन की मां जहां आरा ने बताया कि डॉक्टर कह रहे हैं कि बेटे की छुट्टी ले लो अब उसकी तबियत ठीक है। चेहरे में जलन के कारण वह सुबह से शाम तक चीखता रहता है। हाथ-पैरों में सनसनाहट होती है। एक ही बेटा मेरा कमाने वाला है, अगर उसका इलाज सही नहीं होगा तो वह कैसे ठीक होगा। हमारा क्या होगा। दूसरे घायल मुर्सलीन ने बताया कि वह पीठ से पैरों तक जल गया हैद्ध दोनों हाथ जले हैं। रात में इतनी जलन होती है कि ऐसा लगता है कि जलने वाली जगह से पानी जैसा आ रहा है। बेइंतहा दर्द बर्दाश्त नहीं होता है। इसकी वजह से मुझे दो दिन से बुखार आ रहा है और डॉक्टरों ने मुझे बुखार की दवा भी दी है।
अब डॉक्टर कह रहे हैं कि छुट्टी ले लो और घर पर आराम करो। घर में अगर कोई दिक्कत होगी तो बार-बार अस्पताल कैसे आएंगे। अभी मुझे इतनी तकलीफ है। मेरे घर पर मेरी मां के अलावा और कोई भी नहीं है। कौन मुझे बार-बार अस्पताल और घर लाएगा या ले जाएगा। अगर आराम मिल जाए तो छुट्टी कर दें। मामले में इमरजेंसी प्रभारी डॉ. सपन गुप्ता ने बताया कि रोगी अगर ठीक नहीं हुए हैं तो उन्हें अभी छुट्टी नहीं दी जाएगी। इस बारे में डॉक्टर से बात करेंगे। पूरी तरह से ठीक होने के बाद ही रोगियों की छुट्टी होगी। अभी रोगियों की स्थिति बर्न वार्ड में भर्ती करने वाली नहीं है। इसलिए इमरजेंसी में इलाज किया जा रहा है।